ड्रोन टेरर साज़िश का पर्दाफ़ाश
- अमेरिकी समेत 7 विदेशी गिरफ्तार,
नई दिल्ली, 7 मार्च, 2026 - भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक इंटरनेशनल टेरर साज़िश का पर्दाफ़ाश करके एक बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनियन समेत सात विदेशियों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर गैर-कानूनी एंट्री, हथियारों का गैर-कानूनी इस्तेमाल, ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग और यूरोप से ड्रोन चुराने के गंभीर आरोप हैं। आरोपियों पर भारत में टेरर हमलों की साज़िश रचने के शक में अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अमेरिकी नागरिक को इमिग्रेशन ब्यूरो ने कोलकाता एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया, जबकि तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया। उन्हें वीकेंड पर दिल्ली लाया गया और एक कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ उन्हें शुरू में तीन दिन की पुलिस कस्टडी में रखा गया और बाद में 27 मार्च तक बढ़ा दिया गया।
म्यांमार में एथनिक ग्रुप्स में कृष्णगुहा और उसके साथियों की संलिप्तता को गंभीरता से लिया जा रहा है। NIA के मुताबिक, संदिग्धों ने इंडियन बॉर्डर के रास्ते और एथनिक ग्रुप्स की मदद से यूरोप से गैर-कानूनी तरीके से बड़ी संख्या में ड्रोन इंपोर्ट किए हैं। माना जाता है कि इन ग्रुप्स के भारत विरोधी गतिविधियों से संबंध हैं और कुछ ग्रुप्स पर भारतीय विद्रोही संगठनों से जुड़े होने का भी शक है।
जांच के दौरान, यह भी पता चला है कि प्रवासी आरोपी मिजोरम राज्य के रास्ते म्यांमार में घुसे थे। यह इलाका इसलिए अहम है क्योंकि यह म्यांमार के चिन और रखाइन राज्यों से सटा हुआ है। पता चला है कि उन्होंने मिजोरम जाने के लिए ज़रा सी भी फॉर्मल परमिशन नहीं ली थी।
FIR दर्ज होने के बाद, जांच एजेंसियों ने इस मामले को बहुत प्राथमिकता दी है। NIA ने आरोपियों से पूछताछ करके, उनके कम्युनिकेशन के तरीकों की जांच करके और फंड के सोर्स का पता लगाकर उनके साथियों के नेटवर्क का पता लगाने पर फोकस किया है।
हालांकि ऑफिशियली कोई चौंकाने वाला खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन इस मामले को खास अहमियत दी जा रही है क्योंकि इसके सीधे तौर पर नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े खतरनाक नतीजे हो सकते हैं। विजिलेंस और सिक्योरिटी एजेंसियां इस घटना पर हर तरफ से ध्यान दे रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने जवानों संग मनाई दिवाली
’आईएनएस विक्रांत आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक’
आईएनएस विक्रांत से नौ सैनिकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, आज का दिन अद्भुत है| ये दृश्य अविस्मरणीय है| आज मेरे पास एक तरफ समंदर है, तो दूसरी तरफ मां भारती के वीर जवानों की ताकत है| आज एक तरफ मेरे पास अनंत क्षितिज...अनंत आकाश है और दूसरी तरफ अनंत शक्तियों का प्रतीक यह विशालकाय आईएनएस विक्रांत है| समुद्र के जल पर सूर्य की किरणों की चमक, वीर सैनिकों द्वारा जलाए गए दिवाली के दीयों के समान है| पीएम मोदी ने कहा कि आईएनएस विक्रांत आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है|
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, दीपावली के पर्व में हर किसी को अपने परिवार के बीच दीवाली मनाने का मन करता है| मुझे भी मेरे परिवार जनों के बीच दिवाली मनाने की आदत हो गई है और इसलिए आप जो मेरे परिवार जन हैं, उनके बीच मैं दिवाली मनाने चला जाता हूं| मैं भी ये दिवाली मेरे परिवार जनों के साथ मना रहा हूं... उन्होंने आगे कहा, मुझे याद है, जब आईएनएस विक्रांत को देश को सौंपा जा रहा था तो मैंने कहा था कि विक्रांत विशाल है, विराट है, विहंगम है, विक्रांत विशिष्ट है, विक्रांत विशेष भी है| विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं है बल्कि ये २१वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है|
पीएम नरेंद्र मोदी ने कारवार के तट पर आईएनएस विक्रांत पर दिवाली मनाते हुए कहा, मैं भाग्यशाली हूं कि इस बार मैं दिवाली का यह पावन त्योहार नौसेना के आप सभी वीर जवानों के बीच मना रहा हूं| विक्रांत पर बिताई कल की रात, इस अनुभव को शब्दों में कहना कठिन है| मैं देख रहा था कि आप उमंग, उत्साह से भरे हुए थे... आपने स्वरचित गीत गाए| आपने अपने गीतों में जिस प्रकार से ऑपरेशन सिंदूर का वर्णन किया, शायद कोई और कभी इस अनुभूति को प्रकट नहीं कर पाएगा जो युद्ध के मैदान में खड़ा जवान कर पाएगा|
’ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को इतनी जल्दी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया’
पीएम मोदी ने कहा, कुछ महीने पहले ही हमने देखा कि कैसे विक्रांत नाम ने ही पूरे पाकिस्तान में खौफ की लहर दौड़ा दी थी| इसकी ताकत ऐसी है... एक ऐसा नाम जो युद्ध शुरू होने से पहले ही दुश्मन के हौसले पस्त कर देता है| यही है आईएनएस विक्रांत की ताकत... इस अवसर पर, मैं विशेष रूप से हमारे सशस्त्र बलों को सलाम करना चाहता हूं| भारतीय नौसेना द्वारा जो भय पैदा किया गया है, भारतीय वायुसेना द्वारा दिखाए गए अद्भुत कौशल ने, भारतीय सेना की जांबाजी ने, तीनों सेनाओं के जबरदस्त समन्वय ने, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को इतनी जल्दी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था और इसलिए आज मैं फिर एक बार आईएनएस विक्रांत की इस पवित्र साधना स्थली से, पराक्रमी स्थली से, तीनों सेना के जांबाज जवानों को सलाम करता हूं|
पीएम मोदी ने कहा, पिछले एक दशक में हमारा रक्षा उत्पादन तीन गुना से भी अधिक बढ़ गया है| पिछले साल ही यह लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया| २०१४ से भारत ने नौसेना को ४० से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां प्रदान की हैं| अब हम औसतन हर ४० दिन में एक नया स्वदेशी युद्धपोत या पनडुब्बी नौसेना में शामिल कर रहे हैं| ब्रह्मोस और आकाश जैसी हमारी मिसाइलों ने भी ऑपरेशन सिंदूर में अपनी क्षमता साबित की है| ब्रह्मोस नाम अपने आप में इतना प्रसिद्ध है कि इसे सुनते ही कई लोग उत्सुक हो जाते हैं और सोचते हैं कि क्या ब्रह्मोस आ रहा है| आज दुनिया भर के कई देश इन मिसाइलों को खरीदना चाहते हैं| जब भी मैं विशेषज्ञों से मिलता हूं, तो वे सभी एक ही इच्छा व्यक्त करते हैं कि वे भी इस तक पहुंच चाहते हैं|
पीएम मोदी ने कहा, हमारा लक्ष्य भारत को दुनिया के अग्रणी रक्षा निर्यातकों में शुमार कराना है| पिछले एक दशक में हमारे रक्षा निर्यात में ३० गुना से भी ज़्यादा की वृद्धि हुई है और इस सफलता के पीछे रक्षा स्टार्टअप्स और स्वदेशी रक्षा इकाइयों की बहुत बड़ी भूमिका रही है| हमारा विज्ञान, हमारी समृद्धि और हमारी ताकत मानवता की सेवा और सुरक्षा के लिए है| आज, एक परस्पर जुड़ी हुई दुनिया में, जहां राष्ट्रों की अर्थव्यवस्थाएँ और प्रगति समुद्री मार्गों पर निर्भर करती हैं| भारतीय नौसेना वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है| आज दुनिया की ६६% तेल आपूर्ति और ५०% वैश्विक कंटेनर शिपमेंट हिंद महासागर से होकर गुजरते हैं| इन मार्गों की सुरक्षा में भारतीय नौसेना भारतीय समुद्रों के एक रक्षक की तरह तैनात है|
सैन्य कर्मियों की पीएम मोदी ने तारीफ की
पीएम मोदी ने संबोधन में कहा, मैं सैन्य साजो-सामान की ताकत देख रहा था| ये विशाल जहाज, हवा से भी तेज चलने वाले विमान, ये पनडुब्बियां...ये अपने आप में प्रभावशाली हैं, लेकिन इन्हें चलाने वालों का साहस ही इन्हें असली ताकतवर बनाता है| ये जहाज भले ही लोहे के बने हों, लेकिन जब आप इन पर सवार होते हैं, तो ये सशस्त्र सेनाओं की जीवंत, सांस लेती हुई शक्ति बन जाते हैं| मैं कल से आपके साथ हूं| हर पल मैंने कुछ न कुछ सीखा है| जब मैं दिल्ली से निकला था, तो सोचा था कि मैं इस पल को खुद जीऊंगा| लेकिन आपकी मेहनत, तपस्या और समर्पण इतने ऊंचे स्तर पर है कि मैं इसे सही मायने में जी नहीं पाया| हालांकि, मुझे इसकी समझ जरूर मिली| मैं बस कल्पना कर सकता हूं कि इस जीवन को सही मायने में जीना कितना मुश्किल होगा.
पीएम मोदी ने कहा, जब दुश्मन सामने हो, जब युद्ध की आशंका हो तब जिसके पास अपने दम पर लड़ाई लड़ने की ताकत हो उसका पलड़ा हमेशा भारी रहता है| सेनाओं के सशक्त होने के लिए उनका आत्मनिर्भर होना बहुत आवश्यक है| ये वीर जवान इसी मिट्टी में पैदा हुए हैं, इसी मिट्टी में पले हैं| जिस मां की गोद से उन्होंने जन्म लिया है, वो मां भी इसी मिट्टी में पली-बड़ी है और इसलिए इस मिट्टी के लिए मरने के लिए, इस मिट्टी के मान-सम्मान के लिए अपने आप को खपा देने की वो प्रेरणा रखते हैं... जो ताकत आपके भारतीय होने में है, जो ताकत आपका भारत की मिट्टी से जुड़े होने में जुड़ी हुई है वैसे ही हमारा हर औजार, शस्त्र, हर पुरजा जैसे-जैसे भारतीय होते जाएगा, हमारी ताकत को चार-चांद लग जाएंगे|
पीएम मोदी ने कहा कि हमारी नौसेना ने विदेश में फंसे लोगों को लाने के लिए अभियान चलाए| आपके शौर्य और साहस ने दुनिया में रह रहे भारतीयों के विश्वास को मजबूत किया है| हमारे सैन्य बलों ने जल, थल, नभ में हर परिस्थिति में पूरी संवेदनशीलता के साथ सेवा की है| मैं आज भारतीय तटरक्षक की भी सराहना करता हूं| वे नौसेना के साथ समन्वय बनाकर रातदिन तैनात रहते हैं| हमारे सैन्यबलों के साहस के कारण ने देश ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है|
पीएम मोदी ने फिर किया नक्सलियों के सफाए का जिक्र
पीएम मोदी ने एक बार फिर नक्सलियों के सफाए का जिक्र करते हुए कहा, आज देश नक्सली आतंक से मुक्ति की कगार की पर है| २०१४ से पहले देश के १२५ जिले नक्सली हिंसा की चपेट में थे| दस साल की मेहनत की बाद ये संख्या घटती गई| अब सिर्फ ११ जिलों में नक्लसी बाकी रह गए हैं| १०० से ज्यादा जिले नक्सलवाद से मुक्त होकर दिवाली मना रहे हैं| उन्होंने आगे कहा कि जिन इलाकों में माओवादी नक्सली सड़कें नहीं बनने देते थे, स्कूल नहीं बनने देते थे, स्कूलों के बम से उड़ा देते थे, डॉक्टरों के गोलियों से भून देते थे| अब वहां नए उद्योग लग रहे हैं| हाईवे-स्कूल बन रहे हैं| ये सब सुरक्षाबलों के त्याग, तप से संभव हुआ है| अनेक जिलों में आज लोग आन-बान-शान के साथ दिवाली मनाने जा रहे हैं|
पीएम मोदी ने सैनिकों को सलाम करते हुए कहा, ये वीर सैनिक इसी मिट्टी में जन्मे हैं, इसी मिट्टी में पले-बढ़े हैं| इसलिए वे इस मिट्टी के सम्मान और गरिमा के लिए अपना जीवन दांव पर लगाने की प्रेरणा रखते हैं... आपके जीवन को भारत की मिट्टी से जो शक्ति मिलती है, वह उसी तरह है जैसे हमारा हर हथियार, हर उपकरण, और हर घटक, जैसे-जैसे वह अधिक भारतीय होता जाता है, हमारी सेनाओं में जबरदस्त शक्ति जोड़ता है| हमें गर्व है कि पिछले एक दशक में, हमारे सशस्त्र बलों ने आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ाए हैं|
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आजसे बिहार अभियान
- पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से बातचीत भी करेंगे,
नई दिल्ली, १५ अक्तूबर २५ - प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र मोदी आज बूथ स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत के साथ बिहार विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार शुरू करेंगे। वे मेरा बूथ सबसे मजबूत अभियान के तहत पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। श्री मोदी ने चुनाव अभियान में पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता पूरी ऊर्जा के साथ बिहार में एनडीए की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत से नई ऊर्जा मिलती है। वे कुछ कार्यकर्ताओं के साथ सीधी बातचीत करेंगे।
भारतीय जनता पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए ७१ उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। दो सौ ४३ सदस्यों की बिहार विधानसभा के लिए अगले महीने की ६ और ११ तारीख को, दो चरणों में मतदान होगा। वोटों की गिनती १४ नवंबर को होगी।
'महाभारत के कर्ण' पंकज धीर का निधन
- ६८ साल की उम्र में कालवश,
नई दिल्ली, १५ अक्तूबर २५ - जाने-माने अभिनेता पंकज धीर का निधन हो गया है। ६८ साल की उम्र में उन्होंने मुंबई में आखिरी सांस ली है। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके चलते १५ अक्टूबर को वह जिंदगी की जंग हार गए और इस दुनिया को छोड़कर चले गए।
इलाज के बावजूद उनकी तबीयत में कोई सुधार देखने को नहीं मिला और वह दुनिया को अलविदा को कहकर चले गए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महाभारत टीवी शो में अर्जुन की भूमिका निभाने वाले अभिनेता फिरोज खान ने भी पंकज धीर की मौत की पुष्टि की है। पंकज और फिरोज असल जिंदगी में काफी अच्छे दोस्त हुआ करते थे। अपने दोस्त की मौत के गम पर फिरोज ने सोशल मीडिया पर एक लेटेस्ट पोस्ट शेयर किया है और लिखा है- अलविदा मेरे दोस्त हम आपको काफी याद करेंगे।
कुल मिलाकर कहा जाए तो पंकज का यूं अचानक से दुनिया से चले जाना इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके परिवार और दोस्तों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और तमाम लोग सोशल मीडिया पर पंकज को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
कुछ कलाकार किसी धूमकेतु की तरह उभरते हैं और फिर खो जाते हैं. उन पर कोई एक पहचान इस तरह हावी हो जाती है कि उनकी बाकी पहचानें गुम हो जाती हैं. पंकज धीर ऐसे ही कलाकार थे. आज जब उनके न रहने की खबर आई तो सबको 'महाभारत' सीरियल याद आया और वह कर्ण याद आया जो बहुत सारे लोगों की निगाह में 'महाभारत' का सबसे सशक्त चरित्र है. लेकिन पंकज धीर को जितना कर्ण की शख्सियत ने बनाया, उतना ही पंकज धीर ने भी कर्ण को गढ़ा था.
यह सच है कि कर्ण के चरित्र की जो विडंबनाएं हैं- जन्म के बाद से ही अस्वीकार दिए जाने की उसकी पीड़ा, जातिगत पहचान के आधार पर लगातार उपेक्षा और उपहाल झेलने का दंश, दुर्योधन की मैत्री, जिसमें कई अनचाहे फैसले करने पड़े, युद्धक्षेत्र में शल्य जैसा सारथी और अर्जुन जैसा प्रतिद्वंद्वी- इन सबने मिलकर उसे गढ़ा था. पंकज धीर कर्ण के इस व्यक्तित्व की जटिलता को इस तरह अपने अभिनय में समाहित करते चले गए कि वे बिल्कुल कर्ण ही हो गए.
कर्ण मतलब पंकज धीर
कर्ण का साहस, कर्ण का संयम, कर्ण का दान, कर्ण की बेचैनी- सब हमें बिल्कुल वास्तविक लगते और आने वाले वर्षों में लोगों ने जब भी कर्ण को याद किया तो पंकज धीर का चेहरा ही याद आया. बेशक, यह बात कुछ और कलाकारों के साथ भी घटित हुई, लेकिन पंकज शायद कर्ण के जटिल चरित्र का निर्वाह सबसे सहजता से करते रहे. आज जब पंकज धीर नहीं रहे तो सबको कर्ण याद आ रहा है. वैसे 'महाभारत' का यह किरदार साहित्य और संस्कृति की दुनिया को अरसे से लुभाता रहा है. मराठी उपन्यासकार शिवाजी सावंत का उपन्यास 'मृत्युंजय' कर्ण-कथा कह कर अमर हो गया. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने 'रश्मिरथी' जैसा खंडकाव्य लिखकर कर्ण के चरित्र को अतिरिक्त गरिमा और भव्यता दी.
कर्ण की करुण छवि
लेकिन कर्ण के व्यक्तित्व का जो सबसे महत्वपूर्ण पहलू है, मुझे लगता है, उसी को गलत ढंग से पढ़ा जा रहा है. क्योंकि ऐसा लगता है, जैसे भारतीय मानस में कर्ण की स्मृति जातिवाद के विरुद्ध लड़ने वाले एक शख़्स की स्मृति है. 'रश्मिरथी' में जिस दृढ़ता से वह जातिवाद के विरुद्ध बोलता है, जाति की यंत्रणा को झेलता दिखाई पड़ता है. राजपुरुषों के बीच उपेक्षित सा पड़ा रहता है, वह कर्ण की एक करुण छवि बनाते हैं. उसे मां ने जन्म के साथ त्याग दिया, एक सारथी के घर में वह पला, उसे द्रोण ने शिक्षा से वंचित किया, उससे इंद्र ने कवच-कुंडल ले लिए, उसे परशुराम ने शाप दिया कि वह अपने अंत में अपनी विद्या ही भूल जाएगा, उसे शल्य ने निरुत्साहित किया, वह जब निहत्था था तब उस पर तीर चलाने के लिए कृष्ण ने अर्जुन को उकसाया. यह सब एक विडंबनामूलक किरदार गढ़ते हैं- वह किरदार जो जीवन भर अपने संकल्पों और अपनी शपथों के साथ खड़ा रहा, उसने अपने से श्रेष्ठ माने जाने वाले लोगों को पराजित किया और अंततः मैत्री नाम के एक बड़े मूल्य के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया.
सूत पुत्र कर्ण बनाम सूर्य पुत्र कर्ण
लेकिन यहां एक लम्हे को रुक कर विचार करने की ज़रूरत है. क्या 'महाभारत' की कथा बिना कुछ कहे यह स्थापित नहीं करती कि कर्ण के भीतर जो भी गुण आए, वह उसके जन्म की वजह से आए हैं? क्या कथाकार कभी एक लम्हे को भी भूलने देता है कि कर्ण सूर्यपुत्र है और कुंती का बेटा है- यानी उसकी रगों में भी वही क्षत्रिय रक्त प्रवाहित होता है जो अर्जुन, भीम या दूसरे योद्धाओं में होता है? यानी जो सामाजिक अभिशाप कर्ण को झेलने पड़े, उनका सामना वह इसलिए कर पाया कि वह जन्मना क्षत्रिय है, उच्च कुल का है. इस तरह देखें तो 'महाभारत' की कथा अपने पाठकों के साथ एक तरह का छल करती है. वह जाति के पक्ष में खड़े एक चरित्र को जाति के विरुद्ध संग्राम में खड़ा दिखाती है.
ताउम्र कर्ण ही रहे पंकज धीर
यहां चाहें तो रवींद्रनाथ टैगोर के उपन्यास 'गोरा' को याद कर सकते हैं. उपन्यास का नायक गोरा जीवन भर हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के गुण गाता रहता है- यह मानता हुआ कि वह उच्च कुल में पैदा हुआ हिंदू है, लेकिन अंत में उसे पता चलता है कि वह तो ईसाई मां-पिता की संतान है. गोरा का भ्रम टूटता है, लेकिन कर्ण के भीतर ऐसा कोई भ्रम नहीं है. उसे मालूम है कि वह किनकी संतान है, उसके अधिकार कहां तक जाते हैं और इससे पैदा आत्मविश्वास भी उसका अस्त्र बनता है.
'कर्ण' से जीत नहीं पाए पंकज
पंकज धीर पर लौटें. यह सच है कि कर्ण की छवि और स्मृति से पंकज कभी मुक्त नहीं हो सके. लेकिन इसमें शक नहीं कि उन्होंने अपनी छवि बार-बार तोड़ने की कोशिश की. 'महाभारत' के बाद 'चंद्रकांता' सीरियल में उन्होंने शिवदत्त की भूमिका की और उसे बहुत विश्वसनीयता प्रदान की. फिल्मों में भी टुकड़ा-टुकड़ा भूमिकाओं में आते रहे और अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाते रहे. लेकिन जिंदगी के महाभारत में वे कर्ण से जीत नहीं सके. कर्ण को उन्होंने एक ज़िंदगी दी थी, एक चेहरा दिया था. और जब पंकज नहीं रहे, तो सबको कर्ण याद आया. जीवन भर अपनी पहचान खोजने वाले कर्ण ने अंततः उनमें अपनी एक पहचान पा ली थी.
सोनम वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
- हानिकारक गतिविधियों में शामिल थे', सुप्रीम कोर्ट में बोला लेह प्रशासन,
नई दिल्ली, १४ अक्तूबर २५ - सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख प्रशासन ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का इस्तेमाल करने का बचाव किया है। शीर्ष अदालत को सौंपे गए एक हलफनामे में लेह के जिलाधिकारी ने कहा है कि एनएसए लगाने में उचित प्रक्रिया का ईमानदारी और सख्ती पूर्वक पालन किया गया है। लेह जिला मजिस्ट्रेट ने कहा, "सोनम वांगचुक की गतिविधियाँ राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं के लिए हानिकारक थीं। इसलिए सभी संवैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए उनके खिलाफ एनएसए लगाया गया था।"
लद्दाख प्रशासन ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच के सामने दायर एक हलफनामे में कहीं. यह हलफनामा उनकी पत्नी गीतांजलि अंग्मो के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम १९८० के तहत उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में दिया गया.
लेह प्रशासन ने क्या कहा?
लद्दाख प्रशासन के अधिकारी ने कहा, 'कानून के मुताबिक, मेरे सामने जो सामग्री पेश की गई, उस पर विचार और उस क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं के अंदर की परिस्थितियों को देखते हुए यह आदेश पास किया गया है. अधिकारी ने कहा, 'वांगचुक राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और समुदाय के लिए जरूरी सेवाओं के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल थे. इसका जिक्र हिरासत के आधारों में भी किया गया है.'
लेह के डीएम ने कहा कि जब २६ सितंबर को सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, तो उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम १९८० के तहत उनकी हिरासत और राजस्थान के जोधपुर स्थित सेंट्रल जेल में उनके ट्रांसफर की जानकारी दी गई थी.
'दलीलें झूठी और भ्रामक'
'यह जानकारी लेह पुलिस स्टेशन के एसएचओ के जरिए उनकी पत्नी गीतांजलि अंग्मो को भी तुरंत टेलीफोन पर दी गई थी, जिसे उन्होंने अपनी याचिका में स्वीकार किया है. इसलिए, हिरासत में लिए गए व्यक्ति या याचिकाकर्ता को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, १९८० के तहत हिरासत के आदेश की जानकारी न दिए जाने के संबंध में सभी दलीलें पूरी तरह से झूठी और भ्रामक हैं.' हालांकि यह मामला मंगलवार को सुनवाई के लिए लिस्टेड था, लेकिन वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के दूसरी अदालत में व्यस्त होने के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी. अदालत अब इस पर बुधवार को सुनवाई करेगी.
ऑपरेशन सिंदूर से हलक में आ गई थी जान
- लेकिन शेखी बघार रहे थे मुनीर,
- जानिए शौर्य का एक और किस्सा,
नई दिल्ली, १४ अक्तूबर २५ - ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने किस तरह पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया, इसके बारे में पहली बार भारतीय सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स यानी डीजीएमओ ने विस्तार से बताया. डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने शुरुआत कश्मीर में ९० के दशक में आतंकवाद की बढ़ती गतिविधि से की और पहलगाम अटैक के बाद फिर भारतीय सेना के जवाब और पाकिस्तान में मची खलबली के बारे में विस्तार से बताया.
उन्होंने कहा, '८० के दशक के अंत में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की समस्या शुरू हुई. तब से, २८००० से ज्यादा आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं. ९० के दशक से १ लाख से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को जम्मू-कश्मीर से बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है. ६०००० से ज्यादा परिवारों का पलायन हुआ है. १५००० निर्दोष नागरिक और ३००० से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. यह बिल्कुल साफ है कि यह सब कहाँ से शुरू हुआ है.
डीजीएमओ घई ने आगे कहा, 'ऐसा नहीं है कि ऑपरेशन सिंदूर रातोंरात हुआ हो. अगर आप २००१ में हमारी संसद पर हुए हमले को याद करें, तो हमें अपनी सीमाओं पर लामबंदी करने के लिए मजबूर होना पड़ा था. हम लगभग एक साल तक वहां रहे. फिर भी, एक समझदारी भरी सोच हावी रही, और हमने मामले को आगे नहीं बढ़ाया. २०१६ में, हमारे कुछ सुरक्षाकर्मियों पर बर्बरतापूर्वक घात लगाकर हमला किया गया था, उनके कुछ तंबुओं में आग लगा दी गई थी, और फिर हमने एक ऐसी कार्रवाई की जो नियंत्रण रेखा के आसपास ही थी. २०१९ में, हमने एलओसी के पार एक सटीक हमला किया और उसे वहीं तक सीमित रखा. लेकिन इस बार, जो घटनाएं हुईं, उनकी तीव्रता और व्यापकता बड़ी थी.'
पहलगाम अटैक और सेना की तैयारियां
डीजीएमओ ने आगे कहा, '२२ अप्रैल को, आतंकवाद पहलगाम में आ धमका. नियंत्रण रेखा के पार से प्रायोजित आतंकवादियों ने २६ निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी. उनके धर्म समुदाय के बारे में पूछा और परिवारों और प्रियजनों के सामने उन्हें निर्ममता से गोली मार दी. हमले की जिम्मेदारी लेने के लिए तुरंत आतंकी दावेदार आगे आ गए क्योंकि उनके लिए यह 'गौरव' की बात थी. शुरुआत में कश्मीर प्रतिरोध मोर्चा ने हमले की ज़िम्मेदारी ली, तो उन्हें एहसास हुआ कि मामला शायद उनके नियंत्रण से बाहर हो गया है, और वे तुरंत पीछे हट गए. सभी जानते थे कि जवाबी कार्रवाई सोच के परे वाली होगी. लेकिन हमने अपना समय लिया.'
डीजीएमओ राजीव घई ने आगे कहा, 'सेना प्रमुख पहले ही कह चुके थे कि सेना को आगे की कार्रवाइयों को अंजाम देने और उन पर अमल करने के लिए पूरी छूट थी. २२ अप्रैल से ६-७ मई की रात के बीच तैयारियां चल रही थीं. हम अपने टारगेट्स को तवज्जो दे रहे थे. हमने अपनी सीमाओं पर कुछ एहतियाती तैनातियां कीं कि दुश्मन को रोका जाए. कई इंटर सर्विस सरकारी विभाग और एजेंसियां आपस में कॉर्डिनेट कर रही थीं. टारगेट का आखिरी चुनाव उन बड़ी संख्या में लक्ष्यों में से किया गया जिनकी हमने जांच की थी. जब यह सब हो रहा था, तब एक बहुत ही कॉर्डिनेटेड और एक्टिव इन्फॉर्मेशन वॉर भी चल रहा था.
डीजीएमओ ने दिखाए सबूत
इसके बाद डीजीएमओ ने स्क्रीन पर पाकिस्तान में भारतीय सेना के एक्शन का सबूत भी पेश किया, जिसमें पड़ोसी मुल्क पर भारत की मार साफ नजर आ रही थी. लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा, 'अगर हम मुरीदके की बात करें, तो यह लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी गढ़ है. यहां वायुसेना ने हमला किया और कुछ अहम ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया. ७ मई की सुबह-सुबह किए गए हमलों में १०० से ज्यादा आतंकवादी मारे गए. इसके बाद उन्होंने बहावलपुर की तस्वीरें और वीडियो दिखाए. उन्होंने कहा, 'ये मैक्सार की पहले और बाद की तस्वीरें हैं; आप देख सकते हैं कि रॉकेट और मिसाइलें कहां से गुजरी हैं. इस सांठगांठ का बहुत ही खुला प्रदर्शन किया गया था, जिससे हमें भी हैरानी हुई कि सावधानी को ताक पर रख दिया गया था और तस्वीर सब कुछ बयां कर देती है. संयुक्त राष्ट्र की ओर से बैन एक आतंकवादी, मारे गए लोगों और पाकिस्तानी सेना के प्रमुख लोगों के लिए प्रार्थना सभा की अगुआई कर रहा था, जिसमें खुद चार कोर के जीओसी भी शामिल थे और कई अन्य अहम लोग भी उस दिन मौजूद थे.'
'पाकिस्तानी सेना दबाव में थी'
ले. जनरल घई ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी सेना और उसके चीफ दबाव में थे, सभी जानते हैं. उन्हें न केवल अपनी बल्कि पाकिस्तानी सेना की छवि भी चमकानी थी. उनके लिए सबसे अच्छा और इकलौता तरीका यही था कि वे वही करें जो उन्होंने किया, चाहे वह कितना भी कायरतापूर्ण क्यों न रहा हो. भारत का एक्शन तो कंपसलरी था.' इसके बाद डीजीएमओ ने पाकिस्तान की जीत के दावे पर भी कटाक्ष किया.
उन्होंने कहा, 'जीत का दावा करने में ज्यादा समय नहीं लगता, खासकर जब काइनेटिक कॉन्टैक्ट न हुआ हो, क्योंकि हम बहुत क्लियर थे कि हमें क्या चाहिए. हम आतंकवादियों के पीछे गए और उनका खात्मा करने के बाद हमारा इरादा इसे बढ़ाने का नहीं था, जब तक कि ऐसा करने के लिए मजबूर न किया जाए. आतंकवादी ठिकानों पर हमला होते ही पाकिस्तान ने तुरंत सीमा पार से गोलीबारी भी की, पाकिस्तानियों ने शायद अनजाने में पिछले महीने १४ अगस्त को अपने अवॉर्ड्स की लिस्ट जारी कर दी, और उनकी ओर से मरणोपरांत दिए गए पुरस्कारों की संख्या से अब हमें पता चलता है कि नियंत्रण रेखा पर उनके हताहतों की संख्या भी १०० से ज़्यादा थी. नियंत्रण रेखा पर कार्रवाई की गई और हम इसके लिए तैयार थे.'
प्रधानमंत्री मोदी देंगे किसानों को सौगात
-’पीएम धन-धान्य योजना’ और ’दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ की होगी शुरुआत,
नई दिल्ली, ०९ अक्टूबर २०२५ - प्रधानमंत्री मोदी ११ अक्टूबर के दिन किसानों को दो नई योजनाओं की सौगात देने जा रहे हैं. लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कृषि मंत्रालय की दो अहम नयी योजनाएं- ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना’ और ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ की शुरुआत करेंगे. इन योजनाओं का लक्ष्य उन जिलों में दाल और अन्य खाद्य फसलों की उत्पादकता को बढ़ाना है, जहां अभी उत्पादकता का स्तर काफी कम है.
अलग-अलग फसलों की उत्पादकता अलग-अलग राज्यों में
दरअसल पूरे देश में हर क्षेत्र की उत्पादकता एक जैसी नहीं है. अलग-अलग फसलों की उत्पादकता अलग-अलग राज्यों में अलग है. राज्यों के अंदर भी अलग-अलग जिलों में उत्पादकता का स्तर विभिन्न है.
कृषि मंत्रालय के मुताबिक,
सरकार ने तय किया है कि कम उत्पादकता वाले जिले छांटे जाएंगे और उनमें उत्पादकता बढ़ाने के लिए कुछ विशेष प्रयत्न किए जाएंगे. कम उत्पादकता वाले जिलों को यदि औसत स्तर पर भी ले आएं, तो देश के कुल उत्पादन में बढ़ोतरी होगी. जरूरतें भी पूरी होंगी और उन जिलों के किसानों की आय भी बढ़ेगी. फिलहाल ऐसे १०० जिले चयनिय किए गए हैं जिनपर केंद्रित होकर काम किया जाएगा और प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के तहत इन जिलों में उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रयत्न किए जाएंगे. प्रयत्नों में सिंचाई की व्यवस्था में विस्तार, भंडारण की व्यवस्था, दीर्घकालिक और अल्पकालिक ऋणों की सुविधाओं में विस्तार, फसलों में विविधिकरण शामिल हैं.
नीति आयोग करेगा निगरानी
इस फैसले का ऐलान करते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना आकांक्षी जिलों के लिए बनाए मॉडल पर आधारित है. नीति आयोग डैश बोर्ड के माध्यम से इस योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा. साथ ही, भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है और उपभोक्ता भी है. लेकिन इसके बावजूद भारत सबसे ज्यादा दालों का आयात भी करता है. दलहन के मामले में भारत अभी आत्मनिर्भर नहीं है. इसलिए दालों में आत्मनिर्भरता के लिए ‘दलहन मिशन’ की योजना बनाई गई है.
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा,
दलहन मिशन के तहत बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी, उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर फोकस होगा. सरकार का लक्ष्य २०३०-३१ तक दालों के बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी करना है. वर्तमान में बुवाई क्षेत्रफल २७५ लाख हेक्टेयर है जिसे बढ़ाकर ३१० लाख हेक्टेयर किया जाएगा. अभी दालों का उत्पादन २४२ लाख टन है जिसे बढ़ाकर ३५० लाख टन करने का लक्ष्य तय किया गया है. साथ ही, दाल की अभी उत्पादकता ८८० किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है जिसे बढ़ाकर १,१३० किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करने का प्रयास होगा
कृषि मंत्रालय के मुताबिक, ११ अक्टूबर को प्रधानमंत्री कृषि अवसंरचना कोष, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की १,१०० से अधिक परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी करेंगे. कुल ४२,००० करोड़ रुपये से अधिक की इन योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र में विकास की प्रक्रिया को मजबूत करने की तैयारी है.
तालिबान के विदेश मंत्री मुत्तकी का भारत दौरा!
७ अक्टूबर को मुत्तिक ताज महल का दौरा करेंगे और फिर नई दिल्ली में एक प्रमुख चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम में व्यापार और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे। तालिबान दौरे में व्यापार, सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा होने की संभावना है। ७ अक्टूबर को मुत्तिका नई दिल्ली में अफगान समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत करेंगी। यह दौरा 7 अक्टूबर को काबुल लौटने के बाद समाप्त होगा।
मुत्तकी की अफ़ग़ान-पाकिस्तान यात्रा तनावपूर्ण दौर में रही है. हाल ही में पाकिस्तान ने तलहक-ए-तालिबान पर तालिबान में पाकिस्तान का समर्थन करने का आरोप लगाया था. इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से यात्रा छूट नहीं मिलने के कारण मुत्तकी की यात्रा रद्द कर दी गई थी; भारत की पहल पर ७ सितंबर को यात्रा छूट को मंजूरी दी गई थी. तालिबान प्रतिनिधियों के दौरे से भारत-तालिबान वार्ता को एक नया कदम मिलने की उम्मीद है. सुरक्षा और व्यापार पर चर्चा अहम होगी, वहीं देवबंद के दौरे पर धार्मिक और शैक्षिक संदर्भों पर भी चर्चा हो सकती है.
प्रधानमंत्री मोदी ने नवी मुंबई विमानतल का किया उद्घाटन
- १९,६५० करोड़ की लागत से हुआ तैयार,
मुंबई, ०८ अक्टूबर २०२५ - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट एशिया के सबसे बड़े कनेक्टिविटी हब के रूप में स्थापित होगा| पीएम मोदी ने यह भी कहा कि २०१४ से पहले देश में सिर्फ ७४ एयरपोर्ट थे जो अब १६० को पार कर चुके हैं| नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने एक विशाल जनसभा को भी संबोधित किया|
अपने संबोधन म पीएम मोदी ने कहा कि मुंबई का लंबा इन्तजार आज जाकर खत्म हुआ| शहर क अब अपना दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट मिल गया है| ये एयरपोर्ट एशिया के सबसे बड़े कनेक्टिविटी हब के रूप में स्थापित होने में बड़ी भूमिका निभाएगा| आज मुंबई को पूरी तरह से अंडरग्राउंड मेट्रो भी मिली है, इससे मुंबई के लोगों का सफर आसान होगा और समय की बचत होगी|
पीएम मोदी ने कहा कि यह समय भारत के युवाओं के लिए अनगिनत अवसरों का समय है| कुछ समय पहले ही देश की अनेक खढख को इंडस्ट्री से जोड़ने के लिए ६०,००० करोड़ रुपये की पीएम सेतु योजना शुरू की गई है| आज से महाराष्ट्र सरकार ने सैकड़ों खढख और तकनीकी स्कूलों में नए प्रोग्राम का शुभारंभ किया है| इससे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ड्रोन, सोलर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन जैसी अनगिनत नई टेक्नॉलॉजी की ट्रेनिंग मिल पाएगी| मैं महाराष्ट्र के युवाओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं|
यह ग्रीनफील्ड परियोजना लगभग १९,६५० करोड़ की लागत से बनाई गई है. नए हवाई अड्डे का क्षेत्रफल १,१६० हेक्टेयर में फैला है और यह भारत की एविएशन क्षमता को काफी बढ़ाने के साथ ही मुंबई के मौजूदा छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यातायात के भारी दबाव को कम करेगा. उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री ने नए निर्माणाधीन सुविधाओं का वॉकथ्रू किया.
जल्द शुरू होंगी उड़ानें
नए हवाई अड्डे से घरेलू उड़ान संचालन जल्द शुरू होने की उम्मीद है, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्राएं दिसंबर २०२५ तक चालू होने का अनुमान है. इस हवाई अड्डे में चार टर्मिनल और दो समानांतर रनवे शामिल हैं. इसके अलावा, एक व्हीव्हीआयपी टर्मिनल का निर्माण २०२६ में शुरू होगा और २०३० तक पूरा होने की योजना है.
’नवी मुंबई एयरपोर्ट पर विकसित भारत कि मिलती है झलक’
पीएम मोदी ने कहा की नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें विकसित भारत की झलक है| यह छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती पर बना है, इसका आकार कमल के फूल जैसा है| यानी यह संस्कृति और समृद्धि का जीवंत प्रतीक है| इस नए एयरपोर्ट से महाराष्ट्र के किसान यूरोप और मिडिल ईस्ट के सुपरमार्केट से भी जुड़ पाएंगे|
हवाई चप्पल पहनने वाले भी करें हवाई सफर
पीएम मोदी बोले, ’२०१४ में जब देश ने मुझे अवसर दिया, तब मैंने कहा था कि मेरा सपना है कि हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई सफर कर सकें| हमारी सरकार ने इस मिशन पर गंभीरता से काम शुरू किया और पिछले ११ साल में देश में एक के बाद एक एयरपोर्ट बनते चले गए| २०१४ से पहले हमारे देश में सिर्फ ७४ एयरपोर्ट थे और आज एयरपोर्ट की संख्या १६० को पार कर चुकी है|
देशवासियों की सुरक्षा सबसे पहले: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों कि सुरक्षा पर बोलते हुए कहा कि हमारे लिए देश और देशवासियों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं है| आज का भारत दमदार जवाब देता है और घर में घुसकर मारता है| यह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने देखा है| मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी के साथ-साथ भारत के सबसे वाइब्रेंट शहरों में से एक है| इसलिए, २००८ में आतंकियों ने मुंबई शहर को बड़े हमले के लिए चुना| लेकिन तब जो कांग्रेस सरकार सत्ता में थी, उसने कमजोरी का संदेश दिया और आतंकवाद के सामने घुटने टेक दिए|
प्रधानमंत्री मोदी की देशवासियों ने स्वदेशी अपनाने की अपील
पीएम मोदी ने देशवासियों से स्वदेशी अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि आपसे निवेदन है, स्वदेशी अपनाइए| गर्व से कहिए, यह स्वदेशी है| यह हर घर और हर बाजार का मंत्र होना चाहिए| हर देशवासी स्वदेशी सामान घर लाएगा, स्वदेशी सामान उपहार में देगा| इससे देश का पैसा देश में ही लगेगा| इससे भारत के श्रमिक को काम मिलेगा और नौजवानों को रोजगार मिलेगा| कल्पना कीजिए, जब पूरा भारत स्वदेशी अपनाएगा तो भारत का सामर्थ्य कितना बढ़ जाएगा|
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नए हवाई अड्डे के उद्घाटन को महाराष्ट्र और मुंबई की प्रगति के लिए एक महान क्षण बताया. उन्होंने घोषणा की कि हवाई अड्डा दीनकर बालू पाटिल के नाम पर रखा जाएगा, जिन्होंने नवी मुंबई के विकास के समय परियोजना प्रभावित लोगों के लिए उचित मुआवजे की मांग को बढ़ावा दिया था.
अमित शाह ने झोहो अपनाकर दिया स्वदेशी का संदेश
- गूगल-माइक्रोसॉफ्ट छोड़ जोहो अपनाया!,
नई दिल्ली, ०८ अक्टूबर २०२५ - भारत सरकार झोहो नाम की कंपनी को प्रोमोट कर रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने झोहो अपनाकार देश को दिया स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया है| इसे स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है| शाह ने सोशल मीडिया पर इसका ऐलान किया है| बता दें कि जोहो दस्तावेज, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन के लिए भारत का घरेलू प्लेटफॉर्म है| हाल ही में कई केंद्रिय मंत्रियों ने झोहो के प्रोडक्ट्स की तारीफ़ की और लोगों से इन्हें यूज़ करने को कहा.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी द पर एक पोस्ट किया है. इस पोस्ट में लिखा है कि उन्होंने झोहो मेल पर स्विच कर लिया है. इतना ही नहीं, इस पोस्ट में अमित शाह ने अपनी नई जोहो की ईमेल आईडी भी शेयर की है. इस पोस्ट की लास्ट लाइन भी दिलचस्प है. अमित शाह ने लिखा है, ‘मेरी नई ईमेल आईडी राळीींहरह.लक्षिूेहेारळश्र.ळप है. मेल के जरिए फ्यूचर कॉरेंस्पॉन्डेंस के लिए इसी ईमेल आईडी का इस्तेमाल करें’
गृहमंत्री शाह का ये कदम पीएम मोदी के ’स्वदेशी’ या आत्मनिर्भरता के आह्वान के अनुरूप है| पीएम का ये अभियान आर्थिक विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत में निर्मित उत्पादों को अपनाने को प्रोत्साहित करता है| सोशल मीडिया पर अपने फैसले को साझा करते हुए अमित शाह ने कहा सभी को नमस्कार, मैंने जोहो मेल पर स्विच कर लिया है| कृपया मेरे ईमेल एड्रेस में परिवर्तन पर ध्यान दें|
अमित शाह के द पोस्ट के बाद झोहो का रिप्लाई भी आ गया है. झोहो वर्कस्पेस ने रिप्लाई में शाह का शुक्रिया अदा किया है. कंपनी ने लिखा है कि नैशनल लीडर्शिप का इंडियन इनोवेशन को अपनाना बेहद इंस्पायरिंग है.
अमित शाह के पोस्ट के बाद झोहो फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने एक पोस्ट किया है जिसमें आळीं डहरह को टैग करते हुए उनका शुक्रिया अदा किया है. वेम्बू ने लिखा है कि वो इस मोमेंट को उन इंजीनियर्स को डेडिकेट करना चाहते हैं जो पिछले २० सालों से हार्ड वर्क कर रहे हैं.
क्या है जोहो प्लेटफॉर्म?
ग़ौरतलब है कि झोहो बेंगलुरू बेस्ड प्राइवेट कंपनी है जिसे श्रीधर वेम्बू ने शुरू किया था. इस कंपनी के पास ४५ से ज्यादा प्रोडक्ट्स और सर्विसेज हैं. छोटे बिजसनेसेज के लिए ख़ास तौर पर कंपनी के पास दर्जनों टूल्स अवेलेबल हैं. व्हाटसअप राइवल सव्देशी ऐप अरट्टई भी झोहो का ही है और ये भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है. अगर इसके हेडक्वॉर्टर की बात की जाए तो इसके संस्थापकों ने तमिलानाडु की राजधानी चेन्नई को इसकी स्थापना के लिए चुना था| भारत की इस स्वदेशी कंपनी का काम अमेरिका, चीन और जापान में भी है|
ट्रंप का प्लान फेल; अब और ज्यादा रूसी तेल खरीदेगा भारत!
- पुतिन ने चली बड़ी चाल, रूस ने भारत को दी बड़ी छूट,
नई दिल्ली, ०८ अक्टूबर २०२५ - कच्चे तेल को लेकर रूस ने बड़ी चाल चल दी है, जिससे रूसी तेल की खरीदारी और बढ़ सकती है. साथ ही डोनाल्ड ट्रंप की रूसी तेल को लेकर दबाव की नीति फेल हो सकती है. दरअसल, रूस ने कच्चे तेल पर भारत के लिए बड़ा डिस्काउंट दिया है. नवंबर में यूराल क्रूड लोडिंग पर डेटेड ब्रेंट की तुलना में २ से २.५० डॉलर प्रति बैरल की छूट मिल रही है, जो इसके काफी आकर्षक बना रही है. यह छूट जुलाई-अगस्त के मुकाबले ज्यादा है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने ये छूट अमेरिका और भारत के बीच चल रही व्यापार वार्ता में देरी के बीच दी है. ऐसे में भारतीय रिफाइनरी कंपनियां रूसी तेल की खरीदारी बढ़ा सकती हैं. हालांकि इस महीने की शुरुआत में जहाजों के आवाजाही से पता चल रहा है कि रूस से तेल का आयात बढ़ रहा है.
रूस से इतना बढ़ सकता है तेल का आयात
घश्रिशअॅ ङींव. के अनुसार अक्टूबर में रूस से कच्चे तेल का आयात लगभग १.७ मिलियन बैरल प्रतिदिन हो सकता है, यह पिछले महीने की तुलना में लगभग ६% अधिक है, लेकिन पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है. रूस के इस छूट के बाद भी अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि भारतीय रिफाइनर अमेरिका के साथ बातचीत को देखते हुए रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद को बढ़ाएंगी.
रूसी तेल को लेकर भारत पर ५०% टैरिफ
अमेरिका ने अगस्त में भारतीय वस्तुओं के अमेरिकी आयात पर ५० फीसदी का टैरिफ लगाया था, ताकि भारत पर र्ठीीीळर जळश्र की मांग को कम करने का दबाव बनाया जा सके. हालांकि उसने एक अन्य प्रमुख खरीदार चीन के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया था. जवाब में भारत ने स्पष्ट किया कि ये सौदा बेहतर प्राइस को लेकर है और आगे भी खरीदारी जारी रहेगी. साथ ही भारत ने यह भी क्लियर किया था कि वह अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान ज्यादा अमेरिकी एनर्जी खरीदना चाहता है.
मिडिल ईस्ट के साथ तेल के लिए बात
रूसी तेल पर छूट और अमेरिका से व्यापार समझौते में देरी के कारण भारत के सरकारी तेल रिफाइनरियों ने २०२६ के लिए मिडिल ईस्ट और अफ्रीका की नेशनल तेल कंपनियों के साथ लॉन्गटर्म पर बातचीत शुरू कर दी है. ब्लूमबर्ग के सूत्रों के अनुसार, रिफाइनर उन आपूर्तिकर्ताओं से अधिक मात्रा में उत्पादन की उम्मीद करेंगे जो मात्रा के मामले में लचीलापन प्रदान कर सकें.
अमित शाह का एक्टिंग प्राइम मिनिस्टर की तरह काम
- प्रधानमंत्री मोदी हो जाएं सावधान: ममता बनर्जी,
कोलकाता, ०८ अक्टूबर २०२५ - पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री अमित शाह की तुलना मीर जाफर से कर दी है| ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि अमित शाह देश कार्यवाहक प्रधानमंत्री की तरह काम कर रहे हैं| बीते दिनों बाढ़ से तबाह उत्तरी बंगाल से लौटने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए, ममता बनर्जी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश करना चाहती हैं कि वे अमित शाह पर ज्यादा भरोसा न करें, क्योंकि एक दिन वे मीर जाफर बन कर उन्हें धोखा दे सकते हैं|
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण करवाने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना कर रही थीं| ममता ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ये सरकार देश को खत्म कर देगी| मैंने कई सरकारें देखी हैं लेकिन ऐसी अहंकारी और तानाशाह सरकार कभी नहीं देखी| उन्हें याद रखना चाहिए कि आज ये सत्ता में हैं, कल नहीं भी रह सकते हैं| उनके पार्टी के नेता ने कहा है कि बंगाल में ८ लाख वोटर का नाम काट देंगे| आप खुद बताइए बंगाल में अभी बारिश, बाढ़, त्योहार सब कुछ हैं| ऐसे में वे १५ दिन के अंदर डखठ करवाने की बात कर रहे हैं| इसमें बीजेपी का भी कमीशन होगा|
ममता बनर्जी ने आगे अमित शाह पर निशाना साधा| उन्होंने कहा, ये सब अमित शाह का खेल है| वो एक्टिंग प्राइम मिनिस्टर की तरह काम कर रहे हैं| लेकिन मुझे दुख है कि प्रधानमंत्री भी सब जानते हैं| ममता ने कहा, मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहूंगी कि अमित शाह पर हमेशा भरोसा मत करिए| एक दिन वे आपके बड़े मीर जाफर बन जाएंगे| पहले से ख्याल रखिए|
पीएम मोदी करेंगे इंडिया मोबाइल कांग्रेस का उद्घाटन
- खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी जानकारी,
दिल्ली, ७ अक्तूबर - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ८ अक्टूबर को सुबह यशोभूमि, नई दिल्ली में एशिया के सबसे बड़े टेक इवेंट इंडिया मोबाइल कांग्रेस का उद्घाटन करेंगे. यह कार्यक्रम देश की डिजिटल शक्ति, नवाचार और तकनीकी नेतृत्व को प्रदर्शित करेगा.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पीएम मोदी ने कहा कि वह “इनोवेशन से ट्रांसफॉर्मेशन” थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि इस मंच पर भारत की दूरसंचार और डिजिटल विकास यात्रा पर चर्चा होगी, साथ ही आने वाले तकनीकी अवसरों पर विचार-विमर्श किया जाएगा.
८ से ११ अक्टूबर तक चलेगा शो
दूरसंचार विभाग और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम ८ से ११ अक्टूबर तक चलेगा. इस बार का थीम “Innovate to Transform” रखा गया है, जो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और सामाजिक प्रगति में नवाचार की भूमिका को दर्शाता है.
इस साल के कार्यक्रम में भारत की अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी योजनाओं पर विशेष फोकस रहेगा. इस कार्यक्रम में कई बड़े टेक्नोलॉजी पार्टनर्स और स्टार्टअप्स अपनी इनोवेशन प्रस्तुत करेंगे.
१५० देशों से आएंगे प्रतिनिधि
आयएमसी २०२५ में इस बार भागीदारी का रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है. १५० देशों से १.५ लाख से ज्यादा विजिटर्स, ७००० ग्लोबल डेलीगेट्स और ४०० से अधिक कंपनियां इसमें भाग लेंगी. इवेंट में १०० से ज्यादा सत्रों में ५जी-६जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट मोबिलिटी, क्वांटम कंप्यूटिंग और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर चर्चा होगी.
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी रहेगा जोर
इस कार्यक्रम में जापान, यूनाइटेड किंगडम, रूस, आयरलैंड, कनाडा और ऑस्ट्रिया जैसे देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे. इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक तकनीकी साझेदारी का केंद्र बनाना है.
कार्यक्रम में १,६०० से ज्यादा नए यूज़ केस पेश किए जाएंगे, जो भारत की टेक्नोलॉजी क्षमता और इनोवेशन इकोसिस्टम को दर्शाएंगे.
पीएम मोदी के विजन से जुड़ा डिजिटल भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार भारत को डिजिटल महाशक्ति बनाने के लिए काम कर रहे हैं. डिजिटल इंडिया, ५जी लॉन्च और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे कदमों ने देश को टेक्नोलॉजी के वैश्विक मानचित्र पर मजबूती दी है.
इंडिया मोबाइल कांग्रेस का यह संस्करण उसी दिशा में एक और बड़ा कदम है, जो स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और सरकार को एक साझा मंच पर लाता है.
इंडिया मोबाइल कांग्रेस २०२५ न सिर्फ भारत के तकनीकी विकास का प्रतीक है, बल्कि यह बताता है कि देश अब डिजिटल लीडरशिप की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह कार्यक्रम भारत के नवाचार, सहयोग और आत्मनिर्भरता की कहानी को वैश्विक मंच पर पेश करेगा.
रेलयात्रियों को बड़ी खुशखबरी!
- जल्द कंफर्म टिकट की भी बदल पाएंगे तारीख, नहीं देना होगा कैंसिलेशन चार्ज,
दिल्ली, ७ अक्तूबर - अगर आपकी ट्रेन यात्रा कभी आखिरी वक्त पर टल जाती है और आपको टिकट रद्द कराने की झंझट झेलनी पड़ती है, तो अब राहत की खबर है. भारतीय रेलवे जल्द ही यात्रियों के लिए एक नई सुविधा शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत कंफर्म टिकट की यात्रा तिथि भी बदली जा सकेगी. सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर रेलवे गंभीरता से विचार कर रहा है और बहुत जल्द इसे लागू किया जा सकता है.
अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. अगर यात्रियों की यात्रा योजना बदल जाती है, तो उन्हें टिकट कैंसिल कराकर नई तारीख पर नई बुकिंग करनी पड़ती है. इससे जहां नई बुकिंग का खर्च बढ़ता है, वहीं पुराने टिकट का कैंसिलेशन चार्ज भी कट जाता है. कई बार यात्रियों को यात्रा टलने के कारण दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है.
क्या होगा टिकट बुकिंग का नया नियम?
नए प्रस्ताव के तहत यात्रियों को अपने कंफर्म टिकट की यात्रा तिथि ऑनलाइन बदलने की अनुमति दी जाएगी. इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. यानी अगर आपने किसी दिन की यात्रा का टिकट लिया है और किसी कारणवश वह तारीख बदलनी पड़ जाए, तो आप उसी टिकट को नए दिन के लिए रीशेड्यूल कर सकेंगे. यह सुविधा पूरी तरह डिजिटल होगी और यात्री इसे IRCTC की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से उपयोग कर सकेंगे.
पैसेंजर्स को मिलेगी बड़ी राहत!
सूत्रों ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में यात्रियों को टिकट रद्द करने पर काफी नुकसान होता है, जबकि यात्रा योजनाएं कभी भी बदल सकती हैं. ऐसे में रेलवे को एक अधिक लचीली व्यवस्था लानी चाहिए जिससे लोगों को कैंसिलेशन चार्ज न देना पड़े.
हालांकि नई व्यवस्था में एक बात साफ की गई है — यात्रा की नई तारीख पर सीट की उपलब्धता के अनुसार ही कंफर्मेशन मिलेगा. यानी अगर उस तारीख पर ट्रेन में सीटें खाली हैं, तभी आपका टिकट उस तारीख के लिए मान्य हो जाएगा. अगर नए दिन का किराया पुरानी बुकिंग से अधिक है, तो यात्री को केवल उस अंतर की राशि भरनी होगी.
क्या है टिकट कैंसिलेशन का मौजूदा नियम?
वर्तमान नियमों के अनुसार, अगर कोई यात्री ट्रेन के प्रस्थान से 48 से 12 घंटे पहले टिकट कैंसिल करता है, तो किराए का 25 प्रतिशत हिस्सा काट लिया जाता है. वहीं 12 से 4 घंटे के बीच कैंसिल करने पर चार्ज और बढ़ जाता है. अगर चार्ट बन जाने के बाद टिकट रद्द की जाती है, तो रिफंड नहीं मिलता. इस वजह से हर साल लाखों यात्रियों को नुकसान झेलना पड़ता है.
नई नीति लागू होने के बाद यात्रियों को इस आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी. यह कदम न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगा बल्कि रेलवे के लिए भी फायदेमंद रहेगा, क्योंकि इससे रद्द टिकटों की प्रोसेसिंग और रिफंड का बोझ कम होगा. साथ ही यह व्यवस्था भारतीय रेलवे को और अधिक डिजिटल और यात्रियों के प्रति संवेदनशील बनाएगी.
लाखों पैसेंजर्स को मिल गई मनचाही मुराद
नई नीति लागू होने के बाद देशभर के लाखों रेलयात्रियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा. अब टिकट रद्द कराने की झंझट खत्म होगी, और जो लोग अक्सर बिजनेस या इमरजेंसी के कारण यात्रा टालते हैं, उन्हें अब हर बार नया टिकट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. रेलवे की यह नई योजना “यात्री पहले” के सिद्धांत को मजबूत करती है. डिजिटल बदलावों के साथ यह सुविधा भारतीय रेल के लिए एक बड़ी छलांग साबित हो सकती है.
पेमेंट अब होगा और भी सुरक्षित
- फोनपे और मास्टरकार्ड मिलकर लॉन्च करेंगे नया डिवाइस टोकनाइजेशन सिस्टम,
दिल्ली, ७ अक्तूबर - डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए फोनपे पेमेंट गेटवे ने मास्टरकार्ड के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है. दोनों कंपनियां मिलकर भारत में एक नया डिवाइस टोकनाइजेशन सॉल्यूशन लॉन्च करने जा रही हैं.
इस पहल की घोषणा ग्लोबल फिनटेक फेस्ट २०२५ के दौरान की गई. यह सॉल्यूशन मास्टरकार्ड की टोकनाइजेशन टेक्नोलॉजी को फोनपे के बड़े मर्चेंट नेटवर्क से जोड़ता है, जिससे ग्राहकों को और भी सुरक्षित और तेज ऑनलाइन पेमेंट अनुभव मिलेगा.
क्या है डिवाइस टोकनाइजेशन और इसका फायदा
डिवाइस टोकनाइजेशन एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसमें ग्राहक के कार्ड की असली जानकारी (जैसे कार्ड नंबर) की जगह एक यूनिक डिजिटल टोकन इस्तेमाल किया जाता है. इससे असली कार्ड डिटेल्स किसी वेबसाइट या ऐप पर शेयर नहीं होतीं, जिससे फ्रॉड या डेटा चोरी का खतरा काफी कम हो जाता है.
फोनपे का यह नया सिस्टम “सेव वन्स, यूज एवरीवेयर” अनुभव देगा. यानी ग्राहक एक बार अपने कार्ड को फोनपे ऐप पर सेव करेंगे और फिर सभी पार्टनर वेबसाइट्स या ऐप्स पर उसी कार्ड से सुरक्षित रूप से भुगतान कर सकेंगे, बिना दोबारा कार्ड नंबर डालने की जरूरत के.
इक्सिगो बना पहला पार्टनर
भारत के प्रमुख ट्रैवल प्लेटफॉर्म ixigo ने इस फीचर को अपने प्लेटफॉर्म पर सबसे पहले जोड़ा है. अब इक्सिगो ऐप पर लाखों यूजर्स अपने कार्ड से एक टैप में फ्लाइट, बस और ट्रेन टिकट बुक कर सकेंगे.
फोनपे और मास्टरकार्ड का यह सॉल्यूशन आरबीआई के नियमों के पूरी तरह अनुरूप है. ग्राहक अब ओटीपी डालने के बजाय अपने फोन के फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन से पेमेंट की पुष्टि कर सकेंगे. इससे न सिर्फ सुविधा बढ़ेगी बल्कि सुरक्षा भी मजबूत होगी.
ग्राहक और व्यापारी दोनों को फायदा
इस पहल से ग्राहकों को बार-बार कार्ड जानकारी दर्ज करने की जरूरत नहीं रहेगी. वहीं मर्चेंट्स को इसका फायदा बढ़ी हुई कन्वर्जन रेट और कम ड्रॉप-ऑफ के रूप में मिलेगा.
फोनपे का कहना है कि यह कदम सेव्ड कार्ड सिस्टम को सिंगल वेबसाइट तक सीमित रखने की बजाय पूरे नेटवर्क में उपयोगी बनाएगा. इससे एक यूनिफाइड कॉमर्स एक्सपीरियंस बनेगा, जहां सुविधा और सुरक्षा दोनों साथ चलेंगी.
फोनपे और मास्टरकार्ड के बयान
फोनपे के पेमेंट गेटवे और ऑनलाइन मर्चेंट हेड अंकित गौर ने कहा, “हम डिजिटल पेमेंट को सरल, तेज और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार इनोवेशन कर रहे हैं. मास्टरकार्ड के साथ यह साझेदारी भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल इकॉनमी में ग्राहक विश्वास और व्यापारिक सशक्तिकरण को और मजबूती देगी.”
उन्होंने आगे कहा, “डिवाइस टोकनाइजेशन से ixigo जैसे मर्चेंट लाखों यूजर्स को एक-टैप चेकआउट का भरोसेमंद अनुभव दे पाएंगे, जिससे आरबीआई के नियमों का पालन करते हुए बेहतर ग्राहक संतुष्टि मिलेगी.”
वहीं, मास्टरकार्ड के साउथ एशिया डिजिटल और फिनटेक के उपाध्यक्ष सत्य पाधियारी ने कहा, “डिजिटल पेमेंट में मास्टरकार्ड का उद्देश्य सुरक्षित और समावेशी तकनीकों के जरिए स्मार्ट कॉमर्स के भविष्य को आकार देना है. फोनपे के साथ यह साझेदारी भारत के डिजिटल परिवर्तन को और तेज करेगी और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत बनाएगी.”
इक्सिगो के फ्लाइट एंड होटल बिजनेस एसवीपी नितिन गुरहा ने कहा, “हमारे लिए ग्राहक अनुभव सिर्फ टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं है. फोनपे पीजी और मास्टरकार्ड के इस इंटीग्रेशन से हमारी पेमेंट प्रक्रिया और भी तेज, आसान और भरोसेमंद हो गई है.”
डिजिटल पेमेंट में नया अध्याय
फोनपे और मास्टरकार्ड की यह साझेदारी भारत में डिजिटल पेमेंट को नई दिशा देगी. यह सॉल्यूशन न सिर्फ ग्राहकों के लिए एक सुरक्षित वन-क्लिक अनुभव लाएगा, बल्कि बिजनेस के लिए उच्च कन्वर्जन और बेहतर ग्राहक जुड़ाव भी सुनिश्चित करेगा. साथ ही, यह पहल वीज़ा के साथ फोनपे की मौजूदा टोकनाइजेशन क्षमताओं को भी मजबूत बनाएगी, जिससे कंपनी का सुरक्षित पेमेंट नेटवर्क पूरे देश में और व्यापक होगा.
मोदी कैबिनेट ने दी २४ हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजुरी
- रेलवे में मेगा रिफॉर्म, १८ जिलों में नई रेल लाइनें: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव,
नई दिल्ली, ७ अक्तूबर -केंद्र सरकार ने भारतीय रेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुपरफास्ट ट्रैक पर लाने के लिए बड़ा कदम उठा लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की बैठक में आज रेलवे मंत्रालय के चार बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है. इनकी कुल लागत २४६३४ करोड़ रुपये है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ के १८ जिलों में ८९४ किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी. इससे माल ढुलाई से लेकर पैसेंजर ट्रैफिक तक सब कुछ तेज़ और आसान होगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘आज रेलवे के चार अहम प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है. इनसे ना सिर्फ नई गाड़ियां चलेंगी बल्कि हर साल करोड़ों लीटर डीजल की बचत होगी.’
चार बड़े रेल प्रोजेक्ट जिन्हें मिली मंजूरी
१. वर्धा-भुसावल (तीसरी और चौथी लाइन)
कुल लंबाई ३१४ किमी, लागत ९१९७ करोड़ रुपये. इससे महाराष्ट्र के औद्योगिक इलाकों को तेज रेल कनेक्टिविटी मिलेगी और सालाना करीब ९ करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी.
२. गोंदिया-डोंगरगढ़ (चौथी लाइन)
८४ किमी लंबा प्रोजेक्ट, लागत ४६०० करोड़ रुपये.
यह लाइन महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के टूरिस्ट सर्किट से होकर गुजरेगी. साथ ही ४.६ करोड़ लीटर डीजल की सालाना बचत होगी.
३. वडोदरा-रतलाम (तीसरी और चौथी लाइन)
२५९ किमी लंबा प्रोजेक्ट, गुजरात और एमपी के बीच. लागत करीब ७६०० करोड़ रुपये और अनुमानित ७.६ करोड़ लीटर डीजल की बचत.
४. इटारसी-भोपाल-बिना (चौथी लाइन)
२३७ किमी की लाइन, लागत ३२३७ करोड़ रुपये. हर साल ६.४ करोड़ लीटर डीजल की बचत और माल ढुलाई में तेजी.
प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत ‘रेलवे की नई रफ्तार’
ये सभी प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत लागू किए जा रहे हैं, जो मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करती है. इससे देश की लॉजिस्टिक लागत घटेगी, तेल आयात में कमी आएगी और पर्यावरण पर बोझ भी घटेगा.
सरकार का दावा है कि इन प्रोजेक्ट्स से २८ करोड़ लीटर तेल की बचत और १३९ करोड़ किलो कार्बन उत्सर्जन में कमी होगी – जो ६ करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है.
इन चार प्रोजेक्ट्स से ३६०० से ज्यादा गांवों और करीब ८५ लाख लोगों को डायरेक्ट रेल कनेक्टिविटी मिलेगी. विदिशा और राजनांदगांव जैसे आकांक्षी जिलों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, ‘नई लाइनें खुलने से रोजगार और स्वरोजगार के हज़ारों मौके बनेंगे. कोयला, सीमेंट, स्टील, अनाज जैसी वस्तुओं की ढुलाई आसान होगी. रेलवे का माल परिवहन सालाना 78 मिलियन टन बढ़ेगा.’
रेलवे में अब तक १.५ लाख करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर
पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में सिर्फ रेलवे सेक्टर में अब तक डेढ़ लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है. वहीं कुल मिलाकर देशभर में १२ लाख करोड़ रुपये से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिल चुकी है.
रेल मंत्री ने बताया कि इस साल दीपावली और छठ पर्व पर १२ हजार ट्रेनें चलाई जाएंगी, ताकि ट्रैफिक लोड संभाला जा सके. उन्होंने कहा, ‘ये सिर्फ इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि पिछले कुछ सालों में रेलवे की कैपेसिटी बिल्डिंग पर बड़े पैमाने पर काम हुआ है.’
बच्चों की जान से अब कोई समझौता नहीं
- सिरप पर केंद्र सरकार ने उठाया बड़ा कदम,
रायगढ़, ७ अक्टूबर - राजस्थान और मध्य प्रदेश में छोटे बच्चों की संदिग्ध मौतों के बाद केंद्र सरकार हरकत में आ गई है. खांसी-जुकाम से पीड़ित दो साल से कम उम्र के बच्चों को अब किसी भी तरह का सिरप नहीं दिया जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके लिए देशभर के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को सख्त आदेश जारी किए हैं.
यह कदम बच्चों की सुरक्षा और दवा नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया है. राजस्थान और मध्य प्रदेश में हाल ही में कॉल्ड्रिफ नाम के सिरप पीने के बाद कई बच्चों की मौत हुई थी. इस घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने देर शाम नई गाइडलाइन जारी की.
दो साल से कम उम्र के बच्चों को सिरप देने पर रोक
निर्देशों के बाद छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की लखीराम मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों को आदेश दिया गया है कि बिना डॉक्टर की सलाह किसी भी बच्चे को सिरप न दिया जाए. पंजाब, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश ने भी एहतियाती आदेश जारी किए हैं.
लखीराम मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग प्रभारी डॉक्टर एल. के. सोनी ने बताया कि अब दो साल से कम उम्र के बच्चों को कोई भी कफ सिरप नहीं लिखने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों में सिरप की जरूरत बहुत कम होती है, इसलिए प्राकृतिक तरीके से इलाज करने पर जोर दिया जा रहा है.
बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने उठाए सख्त कदम
कॉलेज के डीन डॉक्टर विनीत जैन ने बताया कि भारत सरकार के दिशा-निर्देश के बाद सभी विभागों को सिरप न देने के आदेश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अब इस नियम का सख्ती से पालन किया जाएगा. बच्चों की मौत के बाद अब केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट है. नई गाइडलाइन का मकसद साफ है. बच्चों की जान से अब कोई समझौता नहीं.
मोदी ने पुतिन को जन्मदिन की दी बधाई
- 'आपके स्वागत के लिए उत्सुक हूं,
नई दिल्ली, ७ अक्टूबर - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की और उन्हें ७३वें जन्मदिन की बधाई दी. इस बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत-रूस के विशेष और प्रिविलेजड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और गहरा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पुतिन को उनके स्वास्थ्य और सभी प्रयासों में सफलता की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि भारत रूस के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक सहयोग को और ऊंचाई पर ले जाने का अवसर तलाश रहा है.
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वे राष्ट्रपति पुतिन का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं. यह मुलाकात भारत में आयोजित होने वाले २३वें इंडिया-रूस एनुअल समिट में होगी. ये समिट इसी साल दिसंबर में होना है.
इस समिट के माध्यम से दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तारित करने और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की योजना बना रहे हैं. पीएम मोदी ने जुलाई २०२४ में मॉस्को यात्रा के दौरान पुतिन को भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था.
रूसी राष्ट्रपति ने आखिरी बार २०२१ में भारत के दौरे पर आए थे. उन्होंने २१ वें वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था.
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय एजेंडा की प्रगति की समीक्षा भी की. इसमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की दिशा पर चर्चा हुई. भारत और रूस के बीच लंबे समय से विशेष और प्रिविलेजड रणनीतिक साझेदारी रही है, और दोनों देश इसे और गहरा करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं.
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच यह फोन संवाद इस बात का संकेत है कि दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को न केवल बरकरार रखना चाहते हैं, बल्कि उसे और विकसित करने के लिए नए मार्ग खोज रहे हैं. इससे आगामी इंडिया-रूस एनुअल समिट में सहयोग के नए क्षेत्र और संयुक्त पहलाओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है.
इस अवसर पर, प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट किया कि भारत रूस के साथ अपने संबंधों को सतत और समग्र दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. दोनों नेताओं की यह बातचीत वैश्विक राजनीति और क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
फूट सकता है सोने का गुब्बारा
-40% तक गिरकर सस्ता हो जाएगा गोल्ड, चांदी मचा सकती है बवाल,
मुंबई, ६ अक्तूबर - सोने की कीमत आसमान छू रही है. हर चढ़ते दिन के साथ सोना की कीमत चढ़ रही है. चांदी भी बुलेट की रफ्तार से भाग रहा है. दीवाली से पहले सोना इतना तमतमाया हुआ है कि एक ही दिन में इसकी कीमत 1400 रुपये तक बढ़ गई है. वहीं चांदी डेढ़ के आंकड़े को छूने के लिए बेताब होकर भाग रहा है. फेस्टिव सीजन में सोना खरीदारों को खूब रुला रहा है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना एक दिन में 1400 रुपये चढ़ 119,522 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है. MCX पर आज चांदी की कीमत 147,675 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई.
सोने की कीमत में आ रही तेजी के पीछे कई फैक्टर्स जिम्मेदार है. अमेरिकी सरकार के टैरिफ ऐलान के चलते बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ा है, जिसकी वजह से निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सेफ हेवल यानी सोने में लगा रहे हैं. अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और ट्रेजरी यील्ड्स में गिरावट के चलते सोने को लेकर आकर्षण बढ़ा है. यूएस गवर्नमेंट के शटडाउन ने आर्थिक डेटा को प्रभावित किया है, जिसकी वजह से बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशकों का फोकस सोने में बढ़ गया है. केंद्रीय बैंकों की ओर से ताबड़तोड़ सोने की खरीदारी हो रही है. निवेशक सोने में पैसा लगे रहे हैं. मांग में तेजी से कीमत में बढ़ोतरी हो रही है.
सोने की कीमत में जारी तेजी पर कई दिग्गज एक्सपर्ट मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आ सकती है. 23 सितंबर को एक इवेंट के दौरान दिग्गज इन्वेस्टमेंट फर्म जेपी मॉर्गन ने बड़ी चेतावनी दी थी. जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमन ने सोने की मौजूदा कीमत को आर्थिक बुलबुला करार दिया और कहा कि ये बबल कभी भी फूट सकता है. उन्होंने कहा कि बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट बना है, जो सोने को ऊंचाईयों पर ले जा रहा है, लेकिन ये तेजी टिकाऊ नहीं है. उन्होंने अनुमान लगाया है कि सोने की मौजूदा कीमत में 40 फीसदी तक का करेक्शन हो सकता है. सोने की कीमत 40 फीसदी तक गिर सकती है. ICICI प्रूडेंशियल जैसे निवेश विशेषज्ञ ने भी सोने की कीमत में बड़ी गिरावट की संभावना जताई है. इतना ही नहीं Citi Research ने गोल्ड प्राइस में बड़े करेक्शन की संभावना जताई है. अपनी रिपोर्ट में सिटी ने कहा है कि नई ऊंचाई पर पहुंचने के बाद गोल्ड की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी.
सिटी रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक निवेश के लिहाज से सोने को लेकर आकर्षण कम हो सकता है. ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ के लिए भी संभावनाएं बेहतर होंगी, फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में कमी करने का असर दिखेगा, जिसकी वजह से सोने की कीमत में गिरावट आ सकती है. जानकारों की माने तो शार्ट टर्म में सोने की कीमत में करेक्शन देखने को मिल सकता है. कमोडिटी एक्सपर्ट्स की माने को गोल्ड में काफी ज्यादा खरीदारी हुई है, अब कमजोर डिमांड से शॉर्ट टर्म में गोल्ड में गिरावट आ सकती है. वहीं दुनिया में अलग-अलग देशों के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, जिसका असर भी सोने की कीमत पर पड़ेगा. कीमत बढ़ने से निवेश की डिमांड में कमी आ रही है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेंशन कम होने से सोने की मांग कमी आएगी. वहीं एक्सपर्ट ये भी मानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ पर नरमी रख सकते सकते हैं, जिसकी वजह से सोने की कीमत में गिरावट देखने को मिलेगी.
जहां सोने की कीमत में बड़ी गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है तो वहीं चांदी की कीमत में तेजी की उम्मीद है. मशहूर अमेरिकी लेखक और इंवेस्टर रॉबर्ट कियोसाकी का कहना है कि आने वाले समय में चांदी की कीमतें अपने मौजूदा दाम से दोगुनी हो सकती है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कमजोर रुपये की वजह चांदी को बल मिल सकता है. कियोसाकी का कहना है कि चांदी निवेश का बड़ा सहारा बनेगा. आज जो इसमें 100 डॉलर लगा रहा है, उसके सालभर के बाद 500 डॉलर मिल जाएंगे.
अगर सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आई तो मुश्किल बढ़ सकती है. खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने बड़े मुनाफे लिए सोने में बढ़चढ़कर निवेश किया है. गोल्ड में निवेश के करने वालों को झटका लग सकता है. ऐसे में निवेशकों को फिलहाल रुकने की सलाह दी जा रही है. कमोडिटी जानकारों का कहना है कि आगे गिरावट के देखते हुए निवेशकों को फिलहाल गोल्ड में निवेश रोक देना चाहिए. गोल्ड ईटीएफ, म्यूचुअल फंड की गोल्ड स्कीम को जारील रखा जा सकता है.



















