ट्रंप का चीन दौरा टाला गया
- युद्ध से जूझ रहे अमेरिका को एक और बड़ा झटका,
वॉशिंगटन (7 मार्च, 26): ईरान-इज़राइल-US युद्ध दुनिया की राजनीति में बड़े बदलाव ला रहा है, और इस लड़ाई का असर हर जगह महसूस किया जा रहा है। अमेरिका की हालत, जो शुरू में जीत की कगार पर थी, दिन-ब-दिन और मुश्किल होती जा रही है। इसी माहौल में, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अपना चीन दौरा टालने का फैसला किया है।
युद्ध के कारण वॉशिंगटन में रहना ज़रूरी बताते हुए, ट्रंप ने अपना दौरा कुछ समय के लिए टाल दिया है। यह दौरा पहले 31 मार्च से 2 अप्रैल तक प्लान किया गया था, और उस समय ट्रंप चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से बातचीत करना चाहते थे। हालांकि, ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। ट्रंप ने कहा कि युद्ध के इस स्टेज पर देश से बाहर जाना सही नहीं होगा। उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, "यहां मेरी मौजूदगी बहुत ज़रूरी है।" उन्होंने भरोसा जताया कि यह युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा, जिससे दुनिया ज़्यादा सुरक्षित हो जाएगी।
इस लड़ाई के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। खास तौर पर, ईरान ने धमकी दी है कि अगर उसके इलाके पर हमले जारी रहे तो वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाएगा। यह स्ट्रेट दुनिया भर में तेल सप्लाई के लिए बहुत ज़रूरी है, जो दुनिया का 20% तेल ढोता है। ट्रंप ने चीन समेत दूसरे देशों से इस पानी के रास्ते को सुरक्षित करने में मदद करने को कहा है; हालांकि, कोई साफ जवाब नहीं आया है। इस बीच, आने वाली ट्रंप-शी जिनपिंग मीटिंग के लिए बातचीत चल रही है, जिसमें ट्रेड और दूसरे दो-तरफ़ा समझौतों पर फोकस रहने की उम्मीद है। मीटिंग से पहले का डिप्लोमैटिक माहौल कई ज़रूरी डेवलपमेंट के लिए एक प्लान किए गए रास्ते का इशारा दे रहा है।
गाजा की सत्ता छोड़ने का इरादा नहीं!
- अल्लाह हू अकबर के नारों के बीच हमास ने घुटनों पर बिठाकर मारे लोग, सिर पर दागी गोली,
तेल अवीव, १५ अक्तूबर २५ - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्यस्थता किए गए शांति समझौते के तहत सभी जीवित बंधकों की रिहाई के कुछ ही घंटों बाद गाजा पट्टी में एक नया संकट पैदा हो गया है। हमास ने कथित 'इजरायली सहयोगियों' और 'गद्दारों' को सार्वजनिक रूप से गोलियों से भून डाला। इससे समझौते की पहली कड़ी ही खतरे में पड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हमास सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगा है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि यदि हमास ने शर्तों का पालन नहीं किया तो 'नर्क जैसी तबाही' का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप की २०-सूत्री योजना का स्वागत, लेकिन विवादास्पद शुरुआत
ट्रंप की प्रस्तावित योजना ३ अक्टूबर को सार्वजनिक की गई थी। इसमें तत्काल युद्धविराम, सभी इजरायली बंधकों की रिहाई (जीवित और मृत), इजरायली कैदियों के बदले सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई और गाजा से इजरायली सेना की आंशिक वापसी शामिल थी। हमास ने योजना के कुछ हिस्सों को स्वीकार करते हुए कहा था कि वह सभी बंधकों को मुक्त करने को तैयार है, लेकिन गाजा के भविष्य और हथियार डालने पर 'फिलिस्तीनी एकता' के आधार पर बातचीत जारी रखना चाहता है।
८ अक्टूबर को मिस्र में अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बाद इजरायल और हमास ने योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे 'मध्य पूर्व में शांति का नया दौर' बताते हुए कहा, "यह युद्ध का अंत नहीं, बल्कि आतंक और मौत के युग का अंत है।" इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कैबिनेट ने भी इसे मंजूरी दी और १३ अक्टूबर को सभी २० जीवित बंधकों की रिहाई हो गई। इजरायल ने बदले में २५० फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया, जिनमें से कई जीवन कैद की सजा काट रहे थे।
हमास की सत्ता पर कब्जे की कोशिश
सीजफायर समझौते के बाद गाजा से सामने आई एक भयावह वीडियो ने झकझोर कर रख दिया है। इस वीडियो में कथित तौर पर फिलिस्तीनियों को घुटनों पर बैठाकर गोलियों से भूनते हुए दिखाया गया है। माना जा रहा है कि यह घटना हमास के लड़ाकों द्वारा की गई है, जिसने इजरायल-हमास के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वीडियो में सात लोगों को एक पंक्ति में घुटनों के बल बैठा हुआ देखा जा सकता है। उनके पीछे हथियारबंद नकाबपोश लोग खड़े हैं। कुछ हमलावरों ने हमास की हरी पट्टी जैसे सिर पर बंधे हेडबैंड पहन रखे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति आगे आकर कैदियों पर कुछ कहता है और कुछ ही क्षणों बाद गोलियों की आवाज गूंजती है। कुछ सेकंड में सभी सात व्यक्ति जमीन पर गिर जाते हैं, जबकि भीड़ ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाती सुनाई देती है।
सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को गाजा में सोमवार को शूट किया गया बताया जा रहा है। हालांकि, ब्रिटिश समाचार पत्र डेली मेल ने यह स्पष्ट किया है कि वीडियो की वास्तविकता, स्थान या इसमें शामिल लोगों की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
हमास पर बढ़ते आरोप और डर का माहौल
कई सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहे बंदूकधारी हमास के सदस्य हैं, जिन्होंने कथित ‘सहयोगियों’- यानी इजरायल से सहयोग करने वाले फिलिस्तीनियों को मार डाला। पिछले महीने भी हमास-नियंत्रित प्रशासन ने तीन लोगों को ‘इजरायल से सहयोग’ के आरोप में फांसी देने की बात स्वीकार की थी। अब यह नया वीडियो संकेत देता है कि हमास शायद फिर से भय और हिंसा के जरिए नियंत्रण कायम करने की कोशिश कर रहा है।
शांति समझौते पर संकट के बादल
यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों ने मिस्र में इजरयल और हमास के बीच एक २०-सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य गाजा में दो वर्षों से जारी खूनी संघर्ष को समाप्त करना था।
समझौते के अनुसार, गाजा को निरस्त्र किया जाएगा।
हमास शासन से बाहर रहेगा और गाजा का प्रशासन एक अस्थायी, तकनीकी विशेषज्ञों की सरकार संभालेगी। हमास को अपने हथियार छोड़ने और राजनीतिक रूप से पीछे हटने की शर्त माननी थी। लेकिन इस ताजा घटना ने यह आशंका बढ़ा दी है कि हमास अब भी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं है और हिंसा के जरिए अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है।
बंधकों के शवों को लेकर बढ़ा आक्रोश
शांति समझौते से पहले हमास ने सभी जीवित बंधकों को रिहा कर दिया था, लेकिन २० मृत बंधकों में से केवल 4 के शव ही लौटाए गए हैं। इससे इजरायल में आक्रोश फैल गया है। कई परिवार, जो अपने प्रियजनों की वापसी की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें यह खबर मिली कि उनके परिजन अब जीवित नहीं हैं।
मानवाधिकार संगठनों की निंदा
अतीत में भी हमास पर सार्वजनिक रूप से फांसी और गोली मारने जैसी सजाओं का आरोप लगता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कई विश्व नेताओं ने इस तरह की बर्बरता की निंदा की है। अब, जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से फैल गया है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर गहरी चिंता जता रहा है कि अगर यह वीडियो असली साबित होता है, तो गाजा में शांति प्रक्रिया फिर से पटरी से उतर सकती है।
अफगानिस्तान ने मारे पाकिस्तान के ५८ फौजी
अमेरिका ने चीनपर ठोका १००% टैरिफ
- ड्रैगन ने ट्रंप की वो दुखती नस दबा दी,
- चीन-अमेरिका की जंग में भारत के हाथ लगी लॉटरी,
वाशिंगटन, १२ अक्तूबर २५ - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टैरिफ का दांव अब उल्टाा पड़ने लगा है. जिस हंटर को चलाकर ट्रंप अमेरिका फर्स्ट का नारा दे रहे थे, अमेरिकी इकोनॉमी में बूस्ट की बात कर रहे थे, अब वो तमाम दावे फुस्स होते नजर आ रहे हैं.उल्टा अमेरिका में इस टैरिफ ने महंगाई ता बम फोड़ दिया है. सबसे बड़ा बम तो चीन ने फोड़ा है. अमेरिका के टैरिफ धौंस से बौखलाए चीन ने रेअर अर्थ मटेरियल के निर्यात को और सख्त करने का ऐलान किया.
चीन के एक्शन से चित हुए ट्रंप
चीन ने अमेरिकी पोत पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था. अमेरिका के रेयर अर्थ मिनरल्स शिपमेंट को भी कम करने का फैसला कर दिया. चीनी एक्शन से डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर १०० फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी, लेकिन इसका नुकसान भी ट्रंप को झेलना पड़ा.चीन की इस कार्रवाई का सबसे बड़ा नुकसान अमेरिका को होने वाला है. अमेरिकी चिप कंपनियों, कार, ईवी जैसी कंपनियों के लिए रेअर अर्थ की उलपब्धता नई समस्या बन गई. चीन के ऐलान पर ट्रंप का भी गुस्सा फूटा और उन्होंने चीनी आयात पर १०० फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला कर दिया. ट्रंप के ऐलान के बाद चीनी सामानों ने अमेरिका में आयात पर १३० फीसदी टैक्स या टैरिफ लगेगा.
बुरी तरह फंसे ट्रंप
ट्रंप दावा कर रहे थे कि टैरिफ से अमेरिका की कमाई बढ़ेगी. अमेरिकियों की आमदनी बढ़ेगी, अमेरिका की इकोनॉमी को फायदा होगा, लेकिन स्थिति बिल्कुल उल्ट दिख रही है. अमेरिका में महंगाई बढ़ती जा रही है. टैरिफ बढ़ने से बाहर से आने वाली चीजों की कीमत बढ़ने से लोगों के खर्च बढ़ गए हैं. महंगाई तो बढ़ी, साथ ही साथ बेरोगजारी बढ़ रही है. पहले से कर्ज पर बैठे अमेरिका के संबंध दुनियाभर के देशों के साथ बिगड़ रहे हैं. अब चीन के साथ बढ़े विवाद ने अमेरिकी कंपनियों को बड़ा झटका दिया है. चीन और अमेरिका की लड़ाई ने क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में तबाही मचा दी. सिर्फ क्रिप्टोमार्केट ही नहीं अमेरिकी शेयर बाजार में भारी तबाही मची है. एनवीडिया, टेस्ला, अमेजॉन के शेयर बुरी तरह से टूट गए. क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन में भारी गिरावट देखने को मिली, निवेशकों को एक ही दिन में १.७ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो गया.
चीन ने चली ऐसी चाल, तिलमिला उठे डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने १ नवंबर से चीन पर कुल १३० फीसदी टैरिफ की बात कही, जिसपर चीन ने भी जवाब देते हुए कहा कि वो पीछे हटने वालों में से नहीं है.चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि हम टैरिफ वॉर नहीं चाहते हैं, लेकिन हमें इससे डर भी नहीं लगता है. चीन के जवाब से साफ है कि वो बैकफुट पर नहीं आने वाला है. चीन के रेयर अर्थ पर लिए गए फैसले से अमेरिकी चिप कंपनियों की हालात बिगाड़ दी. क्वालकॉम के शेयरों में ७.३% और एनवीडिया के शेयरों में लगभग ५% की गिरावट आई है. वहीं एनवीडिया के चिप के आयात पर प्रतिबंध की बात कही गई है. बीजिंग घरेलू सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है. चीन ने अमेरिकी चिप कंपनी क्वालकॉम के खिलाफ एंटीट्रस्ट जांच शुरू कर दी.
रेअर अर्थ पर चीन का नियंत्रण, अब खिसकेगी ट्रंप के पैरों तले जमीन
टैरिफ वॉर, ट्रेड पर उठापटक और अब चीन के रेअर अर्थ मिनिरल्स पर सख्ती ने अमेरिका को विकट परिस्थिति में ला दिया है. अमेरिका पहले से ही शटडाउन की वजह से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. हर दिनों अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है. ऐसे में ट्रे़ड वॉर की वजह से बढ़ती लागत से आने वाले महीनों में कमाई पर असर डालेगी. खुदरा और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से लोगों पर दवाब बढ़ेगा. सरकारी शटडाउन के कारण बाजार की भावना नाजुक बनी हुई है, ऐसे में चीन के साथ टैरिफ विवाद अमेरिका की इकोनॉमी को गंभीर स्थिति में ला सकता है. दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच टैरिफ वॉर से ग्लोबल इकोनॉमी को झटका लग सकता है. इस युद्ध से कई देश प्रभावित हो सकते हैं.
भारत के लिए शानदार मौका
अमेरिका और चीन के बीच इस विवाद का फायदा भारत को हो सकता सकता है.इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलेगा. चीनी सामानों पर टैरिफ बढ़ने से अमेरिका में भारतीय सामानों की कीमत उसकी तुलना में कम होगी, जो मांग को बढ़ा सकती है. चीन से आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से भारत के लिए अमेरिका को निर्यात के बड़े अवसर खुलेंगे. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस की माने तो अमेरिका और चीन के झगड़े से भारत के 86 बिलियन डॉलर, ७.३ लाख करोड़ रुपए के एक्सपोर्ट में और बढ़ोतरी हो सकती है. खासकर टेक्सटाइल, खिलौने और अन्य सामानों के एक्सपोर्टर्स को बढ़ावा मिलेगा. बता दें कि वित्त वर्ष २०२४-२५ में अमेरिका लगातार चौथी बार भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है. दोनों देशों के बीच १३१.८४ अरब डॉलर . इस विवाद से इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है.
सार्वजनिक जगहों पर बुर्का बैन करने का विधेयक पेश
- इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी का बड़ा एक्शन,
रोम, ११ अक्तूबर २५ - इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश में इस्लामिक पहनावे के खिलाफ सख्त एक्शन की तैयारी कर लिया है। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार इस बाबत उन्होंने एक नया विधेयक प्रस्तुत किया है, जिसके तहत बुर्का और अन्य इस्लामिक वस्त्रों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया गया है। इस विधेयक में यह प्रस्ताव किया गया है कि स्कूलों, विश्वविद्यालयों, दुकानों और कार्यालयों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर इस्लामिक पहनावे को धारण करने पर जुर्माना लगाया जाएगा।
इटैलियन मूल्यों की रक्षा के लिए बताया जरूरी कदम
प्रधानमंत्री मेलोनी ने अपनी सख्त प्रवास नीतियों और पारंपरिक इटैलियन मूल्यों की रक्षा के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने यह प्रस्ताव इस्लामिक परिधान को लेकर सुरक्षा और पहचान से जुड़े मुद्दों के कारण दिया है। उनका कहना है कि इस तरह के परिधान, जैसे बुर्का या नकाब, न केवल महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करते हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता में भी बाधा उत्पन्न करते हैं। मेलोनी के इस प्रस्ताव को इटैलियन मूल्यों की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया जा रहा है।
सार्वजनिक जगहों पर पहना बुर्का तो देना होगा जुर्माना
विधेयक में यह भी कहा गया है कि जो लोग इन सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के परिधान पहनते हुए पाए जाएंगे, उन्हें जुर्माना भरना पड़ेगा। जुर्माने की राशि को लेकर अभी तक कोई विशेष आंकड़ा नहीं दिया गया है, लेकिन इसे सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर माना जा रहा है। मेलोनी का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि इटली में एकजुटता और समानता बनी रहे।
विपक्ष कर रहा आलोचना
मेलोनी के इस प्रस्ताव पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आई हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि यह कदम इटली की सांस्कृतिक पहचान और स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए जरूरी है। हालांकि, विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाता है और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करता है। वे इसे भेदभावपूर्ण और असंवेदनशील मानते हैं, खासकर उन महिलाओं के लिए जो अपने धार्मिक विश्वासों के कारण इस परिधान को पहनती हैं।
मेलोनी ने कहा-समाज में समरसता के उद्देश्य से उठाया कदम
इस प्रस्ताव के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह विधेयक इटली में धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है या नहीं। हालांकि, मेलोनी ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य समाज में शांति और समरसता बनाए रखना है, न कि किसी विशेष धर्म या समुदाय के खिलाफ कोई कदम उठाना। इसलिए यह कदम उठाया गया है।
पाकिस्तान में टीएलपी के विरोध प्रदर्शन से हिंसा तेज
- मुनीर और शहबाज की कुर्सी खतरे में,
लाहौर, ११ अक्तूबर २५ - पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के चलाए गए विरोध प्रदर्शनों ने आज शनिवार को एक नया मोड़ लिया है। इसने हिंसा और आगजनी की घटनाओं को जन्म दिया है। पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान स्थिति तेजी से बिगड़ गई है, जिसमें सरकार के खिलाफ गुस्से और आक्रोश का इज़हार किया जा रहा है। इससे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर की कुर्सी भी डवांडोल होने लगी है। पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया के अनुसार इस विरोध प्रदर्शन में कई आंदोलनकारियों के साथ पुलिस कर्मियों की भी मौत हो गई है। दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
क्यों विरोध पर उतरे टीएलपी समर्थक
टीएलपी के समर्थक और कार्यकर्ता ईशनिंदा कानून और धार्मिक संवेदनाओं के मुद्दों पर सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने लाहौर, इस्लामाबाद, कराची, और अन्य बड़े शहरों में सड़कों को अवरुद्ध कर दिया है। साथ ही सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पों का सिलसिला जारी है। इन प्रदर्शनों में कई मौतें हुई हैं और सैकड़ों लोग घायल हो गए हैं।
हिंसा और आगजनी
टीएलपी समर्थकों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के खिलाफ जमकर हिंसा की, और कई जगहों पर सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया। लाहौर और कराची में बड़ी संख्या में दुकानों और बैंकों में आग लगाई गई है। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर बेरिकेड्स लगाए, और पुलिस को खदेड़ते हुए गाड़ियों को जलाया। इस हिंसा ने न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि शहरों की सुरक्षा स्थिति को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
राजनीतिक संकट गहराया
इन विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और स्थिति को खतरे में डाल दिया है। अब तक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में भारी नुकसान हुआ है। पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर के खिलाफ भी लोगों में जमकर गुस्सा है। शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सरकार जल्दी इस स्थिति को काबू नहीं कर पाई तो यह पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिरता को गहरे संकट में डाल सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, शहबाज शरीफ और असीम मुनीर दोनों की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है।
कई जगहों पर कर्फ्यू और सेना की तैनाती
पाकिस्तान की पुलिस और सेना ने इन विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना के हस्तक्षेप की संभावना जताई जा रही है। कई इलाकों में सेना को तैनात किया गया है, और शहरों में कर्फ्यू लगाने की भी खबरें आ रही हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने सेना के खिलाफ भी नारेबाजी शुरू कर दी है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।
अब तक कई मौतें
सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौतें हो चुकी हैं। विभिन्न स्रोतों के अनुसार कम से कम ३० लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि १०० से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसे एक राष्ट्रीय संकट करार दिया है और अस्पतालों में आपातकालीन स्थिति घोषित कर दी गई है।
अमेरिका-चीन व्यापारयुद्ध: ट्रंप ने लगा दिया १००% और टैरिफ
- ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद वैश्विक शेयर बाजारों में हाहाकार,
वाशिंगटन, ११ अक्तूबर २०२५ - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चीन के खिलाफ अतिरिक्त १०० प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप के इस फैसले से दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। ट्रंप सरकार का यह कदम १ नवंबर २५ से लागू होगा और यह १०० फीसदी टैरिफ मौजूदा टैरिफ से अलग होगा। यानी अमेरिका का चीन के खिलाफ टैरिफ अब १४० प्रतिशत तक पहुंच सकता है। ट्रंप ने यह फैसला चीन द्वारा रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर लगाए गए नए नियंत्रणों के जवाब में लिया है, जिसे उन्होंने "अभूतपूर्व आक्रामकता" और "नैतिक अपराध" करार दिया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, "चीन ने दुनिया को बंधक बनाने की कोशिश की है। १ नवंबर २५ से अमेरिका चीन पर १००% टैरिफ लगाएगा, जो वर्तमान टैरिफ के अतिरिक्त होगा।" इसके अलावा, उन्होंने "सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर" पर अमेरिकी निर्यात नियंत्रण लगाने की भी घोषणा की, जो तकनीकी क्षेत्र में चीन को झटका देगी। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर चीन कोई और कदम उठाता है तो यह टैरिफ 1 नवंबर की समयसीमा से पहले भी लागू किया जा सकता है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "अभी-अभी पता चला है कि चीन ने व्यापार के मामले में बेहद आक्रामक रुख अपनाया है और दुनिया को एक बेहद आक्रामक पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि वे १ नवंबर २५ से अपने लगभग हर उत्पाद पर, यहां तक कि उन उत्पादों पर भी जो उनके द्वारा नहीं बनाए गए हैं, बड़े पैमाने पर निर्यात नियंत्रण लगाएंगे। यह बिना किसी अपवाद के सभी देशों को प्रभावित करेगा और जाहिर तौर पर यह योजना उन्होंने वर्षों पहले ही बना ली थी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में ऐसा बिल्कुल नहीं सुना गया है और अन्य देशों के साथ ऐसा व्यवहार करना एक नैतिक अपमान है। इसके जवाब में, अमेरिका ने केवल अपने हितों को ध्यान में रखते हुए, चीन के इस कदम का कड़ा जवाब देने का फैसला किया है। १ नवंबर २५ से (या चीन के किसी और कदम के आधार पर उससे पहले), अमेरिका चीन से आयातित सभी वस्तुओं पर वर्तमान टैरिफ के अतिरिक्त १००% टैरिफ लागू करेगा। इसके साथ ही, अमेरिका उसी तारीख से सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण लागू करेगा। यह विश्वास करना असंभव है कि चीन ने ऐसा कदम उठाया, लेकिन उन्होंने ऐसा किया है, और अब इसका परिणाम इतिहास बनेगा।"
दुर्लभ खनिजों पर चीन का नियंत्रण
चीन ने गुरुवार को दुर्लभ पृथ्वी तत्वों यानी रेयर अर्थ मिनरल्स और उनसे जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगाए, जो चिप्स, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए आवश्यक हैं। इन खनिजों के लिए अमेरिका चीन पर 80 प्रतिशत से अधिक निर्भर है। ट्रंप ने इसे "दुष्ट और शत्रुतापूर्ण" बताते हुए कहा कि इससे "दुनिया के हर देश की जिंदगी मुश्किल हो जाएगी।" चीन के इस कदम से पहले, दोनों देशों के बीच मई से एक नाजुक व्यापार युद्धविराम चल रहा था, जो अगस्त में ९० दिनों के लिए बढ़ाया गया था।
इससे पहले दिन में ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली आगामी बैठक को रद्द करने की धमकी दी थी, जो दक्षिण कोरिया में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन से पहले होनी थी। हालांकि, शुक्रवार शाम को वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "हम देखेंगे कि क्या होता है।" उन्होंने बैठक को पूरी तरह रद्द न करने का संकेत दिया, लेकिन तनाव स्पष्ट है।
बाजारों पर प्रभाव: शेयर बाजारों में भारी गिरावट
ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद वैश्विक शेयर बाजारों में हाहाकार मच गया। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर डाउ जोन्स इंडेक्स में २.५ प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि नैस्डैक में ३ प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई। एशियाई बाजारों में हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स ४ प्रतिशत लुढ़क गया। विश्लेषकों का कहना है कि १०० प्रतिशत शुल्क से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ेगा, क्योंकि चीनी से आना वाला सामान जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने और उपकरण महंगे हो जाएंगे। वेल्स फारगो इकोनॉमिक्स के अनुसार, वर्तमान में चीनी आयात पर प्रभावी टैरिफ दर ४० प्रतिशत है, जिसमें स्टील-एल्यूमिनियम पर ५० प्रतिशत और उपभोक्ता सामानों पर ७.५ प्रतिशत शामिल हैं। नया शुल्क इसे दोगुना से अधिक कर देगा।
इजरायल-हमास के बीच सीजफायर
- फिलिस्तीन में जश्न, खंडहरों में गूंजी खुशियां,
गाझा, ०९ अक्टूबर २०२५ - फिलिस्तीन में आज जश्न जैसा माहौल है, खास तौर पर गाजा पट्टी में. इजरायल और हमास में सीजफायर के बाद हर तरफ खुशी का माहौल है. गाजा से विस्थापित मोहम्मद वादी कहते हैं कि वो अल्लाह से दुआ मनाते हैं कि पूरे गाजा पट्टी में ये खुशी का माहौल बना रहे. उन्होंने कहा कि वो उम्मीद करते हैं कि सीजफायर बरकरार रहे और आगे फिर से युद्ध न हो. गाजा की सड़कों पर खुशी का आलम ये है कि कई फिलिस्तीनी अल्लाह महान है.. चिल्लाते देखे गए.
इजरायल और फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के बीच गुरुवार को सीजफायर के पहले चरण के एग्रीमेंट पर दस्तखत हो गए. इजिप्ट के शर्म-अल-शेख में हुई बातचीत के बाद दोनों तरफ के अधिकारियों ने डील साइन होने की पुष्टि की है. दो साल तक चले इस युद्ध में ६७ हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं.
पूर्वी गाजा के रहने वाले मोहम्मद वादी का कहना था कि आज हमें सीजफायर की खबर मिली है. इसका मतलब साफ है कि युद्ध के दौरान होने वाले खूनखराबे से निजात मिलेगी. हर तरफ खुशी का माहौल है. कमाल की खुशी हर तरफ फैली है. इतनी खुशी कि मैं बता नहीं सकता. मेरे दिल में क्या चल रहा है, मैं आपको शब्दों में नहीं बता सकता.
इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम से सिर्फ गाजा में बचे-खुचे लोग ही नहीं, वहां से विस्थापित हुए लोगों में भी खुशी है. गाजा पट्टी से विस्थापित एक महिला ने कहा कि इस युद्धविराम से मुझे बेहद खुशी हो रही है. गाजा पट्टी में रहने वाले तो ज्यादा ही खुश हैं.
गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महीने की थका देने वाली बातचीत के बाद इजरायल और हमास के बीच चल रहे दो साल पुराने युद्ध में संघर्षविराम का ऐलान किया था. इसके तहत इजरायल की सेना गाजा के बड़े हिस्से से हटेगी. वह फिलिस्तीनी बंधकों को भी छोड़ देगा. बदले में हमास भी बंधकों को रिहा करने के लिए राजी हो गया है.
फिलीस्तीनी बंधकों के बदले हमास सभी २० इजरायली जिंदा बंधकों को अगले कुछ दिनों में रिहा करेगा. इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इसकी पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि ईश्वर की मदद से हम सभी बंधकों को घर लाएंगे.
हमास ने अलग से बयान जारी करके कहा कि इस डील से गाजा पट्टी से इजरायली सैनिक हटेंगे और यहां राहत और सहायता समूह को एंट्री मिल सकेगी. हमास ने कहा कि ट्रंप के प्रस्ताव के बाद हमने काफी विचार विमर्श करके इस डील को मंजूर किया है. हमास ने ट्रंप से ये भरोसा मांगा है कि इजरायल अपने सैनिकों को हटाएगा.
गाजा में शांति उम्मीदों के बीच नए मोर्चे पर जंग की आहट
- भारत के पड़ोसी ने तैनात किए दर्जनों युद्धपोत,
नई दिल्ली, ०९ अक्टूबर २०२५ - दो साल से तबाही झेल रहे गाजा में शांति की उम्मीद जगी है| एक हफ्ते पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित २० सूत्री प्लान के पहले चरण पर अब हमास ने भी अपनी हामी भर दी है| इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही ट्रंप के प्लान पर अपनी सहमति दे चुके हैं| इसके साथ ही गाजा पट्टी में अब हमले थमने और वहां शांति स्थापना की उम्मीदें बढ़ गई हैं| इसके साथ ही दोनों तरफ से बंधकों की रिहाई की आस भी जगी है लेकिन दुनिया में तीसरे मोर्चे पर एक नई जंग की आहट तेज हो गई है|
दरअसल, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि भारत के पड़ोसी देश चीन ने ताइवान के साथ बढ़ते तनाव के बीच यांग्त्जी नदी के मुहाने पर बड़ी संख्या में युद्धपोत तैनात कर दिए हैं| न्यूज वीक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती की यह एक दुर्लभ घटना है| इससे चीन और ताइवान के बीच जंग की आहट तेज हो गई है| रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दोनों सेनाओं के बीच तनाव का उच्चतम स्तर है| रिपोर्ट में कहा गया है कि इतनी बड़ी संख्या में चीनी युद्धपोतों की तैनाती ताइवान पर हमले का संकेत हो सकता है|
ताइवान पर हमले के संकेत
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी ने अपनी सैन्य शक्ति का लगातार इजाफा किया है| युद्धपोतों और पनडुब्बियों की संख्या के हिसाब से चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है, जिसके पास ३७० से ज़्यादा युद्धपोत और पनडुब्बियाँ हैं| इनमें लैंडिंग डॉक जहाज, हेलीकॉप्टर वाहक और विशेष लैंडिंग बार्ज शामिल हैं| बार्ज के बारे में विश्लेषकों का कहना है कि ये ताइवान जलडमरूमध्य और समंदर पार कर ताइवान पर हमले कर सकते हैं|
२५,००० टन का ट्रांसपोर्टेशन शिप तैनात
६ अक्टूबर, २०२५ को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में शंघाई के यांग्त्ज़ी नदी मुहाने में कई उभयचर जहाज़ खड़े दिखाई दे रहे हैं| यह मुहाना प्रमुख समुद्री रसद केंद्र है| ओपन-सोर्स रक्षा विश्लेषक एमटी एंडरसन ने सैटेलाइट इमेजरी में टाइप ०७१ युझाओ-क्लास लैंडिंग प्लेटफ़ॉर्म डॉक (ङझॄ) की पहचान की है| यह २५,००० टन का एक ट्रांसपोर्टेशन शिप है जो किसी उभयचर हमले के दौरान लैंडिंग क्राफ्ट, बख्तरबंद वाहनों और सैकड़ों सैनिकों को विवादित तट तक ले जाने में सक्षम है|
चीन और ताइवान में अदावत पुरानी
बता दें कि चीन ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करने की बात कह चुका है| हाल के दिनों में चीनी सेना ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास और समंदर पार कर लगभग हर दिन ताइवान पर सैन्य विमानों की उड़ानें संचालित कर ताइवान पर हमलों का दबाव बढ़ा दिया है| ताइपे और वाशिंगटन चीन के इस कदम को अस्थिरता पैदा करने वाला कदम बताया है|
भारत- ब्रिटेन के बीच बड़ी डिफेंस डील पर मुहर
-पीएम मोदी और ब्रिटिश पीएम की मौजूदगी में ३,८८४ करोड़ की डील पर मुहर,
मुंबई, ०९ अक्टूबर २०२५ - भारत और ब्रिटेन के बीच बड़ी रक्षा डील हुई है. मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने ४६८ मिलियन डॉलर (करीब ३,८८४ करोड़ रुपये) की डिफेंस डील पर सहमति जताई है. इस समझौते के तहत ब्रिटेन इंडियन आर्मी को हल्के वजन वाली मल्टीरोल मिसाइलें सप्लाई करेगा. थेल्स की कंपनी इन मिसाइलों का निर्माण करेगी.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार ने इसे अपने डिफेंस इंडस्ट्री और भारत के साथ गहराते सामरिक रिश्तों के लिए ऐतिहासिक मोड़ बताया है. यह मिसाइलें ब्रिटिश कंपनी थेल्स द्वारा उत्तरी आयरलैंड में बनाई जाएंगी. ब्रिटिश सरकार का कहना है कि इस सौदे से करीब ७०० ब्रिटिश नौकरियां सुरक्षित रहेंगी, जो फिलहाल यूक्रेन को हथियार सप्लाई करने वाले इसी संयंत्र में कार्यरत हैं. ब्रिटिश सरकार ने अपने बयान में कहा, यह डील भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्लेक्स वेपंस पार्टनरशिप की दिशा में बड़ा कदम है, जिस पर दोनों देश बातचीत कर रहे हैं.
भारत के लिए यह डील क्यों महत्वपूर्ण
भारत के पास पहले से ही कई तरह की मिसाइलें हैं, लेकिन आधुनिक, हल्की और मल्टीरोल मिसाइलें इंडियन आर्मी को तुरंत जवाब देने में मदद करेंगी. ये मिसाइलें समुद्र और जमीन दोनों जगहों पर इस्तेमाल की जा सकती हैं, जिससे रणनीतिक फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है.
ब्रिटेन के साथ यह डील टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का रास्ता खोलती है. इससे भारत को उन्नत मिसाइल तकनीक सीखने और संभवतः देश में स्थानीय निर्माण करने का अवसर मिलेगा. ब्रिटेन में इस सौदे से ७०० नौकरियां सुरक्षित होंगी, और भारत के लिए भी यह रक्षा उद्योग में निवेश और उत्पादन बढ़ाने का संकेत है.
दोहरी साझेदारी पर जोर
मुंबई में हुई इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों की भी समीक्षा की. कुछ महीनों पहले हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद अब दोनों देश रक्षा और टेक्नोलॉजी साझेदारी पर भी फोकस कर रहे हैं. ब्रिटेन ने यह भी घोषणा की कि भारत के साथ नौसैनिक जहाज़ों के लिए इलेक्ट्रिक इंजन तकनीक पर भी एक नया समझौता हुआ है. इस प्रोजेक्ट का प्रारंभिक मूल्य २५० मिलियन पाउंड बताया गया है.
टैरिफ, नीतिगत अनिश्चितता और घाटा बढ़ा
- डॉलर का इमारत ढह रही है,
नई दिल्ली, ०८ अक्टूबर २०२५ - अमेरिका में शटडाउन चल रहा है| वहीं, अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सरकारी शटडाउन को लेकर चिंताओं के कारण तेजी के बीच सोना पहली बार ४,००० डॉलर प्रति औंस के पार चला गया| ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोने के भाव पूरी दुनिया में आसमान छू रहे हैं| वहीं, डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं, क्योंकि सरकार का बंद एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है और इसका कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है| अमेरिका में मंदी के हालात हो रहे हैं| वहीं, दूसरी ओर डॉलर का एकाधिकार भी कम हो रहा है|
अमेरिकी अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे ढह रही है
डेली इकॉनॉमी मे छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन का नवीनतम आर्थिक पूर्वानुमान अमेरिका के लिए एक चेतावनी की तरह है| हालांकि संगठन ने वर्ष की पहली छमाही में आश्चर्यजनक लचीलेपन के बाद २०२५ में वैश्विक विकास दर को बढ़ाकर ३.२ प्रतिशत कर दिया है, फिर भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से गिरावट का अनुमान है| २०२४ में २.८ प्रतिशत की वृद्धि दर से घटकर २०२५ में केवल १.८ प्रतिशत और फिर २०२६ में १.५ प्रतिशत तक गिर जाएगी|
इस रिपोर्ट में वाल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से बताया गया है कि ओइडीसी का अब मानना है कि निकट भविष्य में अमेरिका की आर्थिक वृद्धि कम तेजी से धीमी होगी| हालांकि, यह चेतावनी भी दी है कि २०२६ में संरक्षणवादी उपायों के पूर्ण रूप से प्रभावी होने पर टैरिफ का कड़ा असर पड़ेगा|
डॉलर के गढ़ में लगी सेंध, ब्रिक्स ने बदला गणित
फायबर २ फ्याशन के अनुसार, दशकों से अमेरिकी डॉलर ने वैश्विक वित्त पर अपनी अटूट पकड़ बनाए रखी है| यह व्यापार, आरक्षित निधियों और सीमा-पार समझौतों के लिए एक मानक माध्यम रहा है| यह वस्तुओं की कीमतें तय करने से लेकर केंद्रीय बैंक की नीतियों तक हर चीज के लिए एक आधार है| हालांकि, बदलते समीकरणों, बढ़ते संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक बदलाचों के चलते दुनिया में अब डॉलर के इस साम्राज्य में सेंध लग चुकी है| भले ही अभी डॉलर का पलड़ा भारी हो, मगर उसके गढ़ में सेंध लग चुकी है| ब्रिक्स के देश अब अपनी मुद्राओं में कारोबार करने पर सहमत हो गए हैं| ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे|
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मौजूदगी ८८ फीसदी
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हवाले से रिपोर्टों में दावा किया गया है कि १९९९ और २०१९ के बीच पूरे अमेरिका में व्यापार चालान में डॉलर का योगदान ९६ प्रतिशत, एशिया-प्रशांत में ७४ प्रतिशत और अन्य जगहों पर ७९ प्रतिशत था| विदेशी मुद्रा बाजार में इसकी उपयोगिता बेजोड़ है, जहां यह लगभग ८८ प्रतिशत मुद्रा विनिमय में शामिल है|
ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अमेरिका को पहुंचाया नुकसान
अगर रिपोर्टों पर विश्वास किया जाए तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के साथ कई देशों के कारोबार को ट्रेड वॉर बना दिया| ट्रंप की हाई टैरिफ नीतियों ने अमेरिका के संबंध कई देशों से बिगाड़ दिए| पिछले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाया गया था| इसमें ब्रिक्स की ओर से तथाकथित डी-डॉलरीकरण के प्रयासों पर जोर दिया गया|
चीन, रूस और इंडोनेशिया ने कर दी पहल
हाल ही में, चीन और इंडोनेशिया ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में अपनी घरेलू मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक स्थानीय मुद्रा निपटान ढांचा शुरू करके एक ठोस कदम उठाया है| यह पहल मई में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन पर आधारित है, जिसके तहत भुगतान संतुलन से संबंधित सभी मदों को शामिल करने के लिए एक पूर्व समझौते का विस्तार किया गया था| इससे पहले चीन और रूस की ओर से अपनी मुद्राओं का उपयोग करके व्यापार करने की भी पहले खबरें आई हैं, जबकि कुछ देशों ने कथित तौर पर ऐसे समझौतों की सक्रिय रूप से वकालत की है जो स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देते हैं या वैकल्पिक निपटान मानक अपनाते हैं|
डोनाल्ड ट्रंपने फिर पुराना राग अलापा
ट्रंप ने कहा, 'अगर मेरे पास टैरिफ की ताकत नहीं होती, तो ७ में से कम से कम ४ युद्ध चल रहे होते...। अगर आप भारत और पाकिस्तान के मामले में देखें, तो वो इस ओर जाने ही वाले थे। ७ विमान गिरा दिए गए थे।' उन्होंने कहा कि टैरिफ ने अमेरिका को सिर्फ आर्थिक फायदा ही नहीं दिया है, बल्कि शांति स्थापित करने में भी मदद की है। उन्होंने कहा, 'मैं वह एकदम नहीं कहना चाहता, जो मैंने कहा था, लेकिन मैंने जो कहा था वह बहुत असरदार था...। हम न सिर्फ अरबों डॉलर कमा रहे हैं, बल्कि टैरिफ की वजह से शांति स्थापित करने वाले भी बने हैं।'
भारत पर ट्रंप का टैरिफ अटैक
ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क दोगुना कर ५० प्रतिशत कर दिया है, जिसमें भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए २५ प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। भारत ने साफ किया है कि उसे रूसी तेल की खरीद के चलते अमेरिका और यूरोपीय संघ की तरफ से निशाना बनाया जा रहा है।
जल्दी समझौते की उम्मीद
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने सोमवार को भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही एक व्यापार समझौता हो जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों देश पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुब्रह्मण्यम ने यह भी कहा कि भारत को शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करना चाहिए और विनिर्माण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के लिए अपने बाजारों को खोलना चाहिए।
उन्होंने यहां तिमाही आधार पर व्यापार विश्लेषण पर जारी रिपोर्ट (ट्रेड वॉच क्वार्टरली) जारी करते हुए संवाददाताओं से कहा, 'अच्छी बात यह है कि दोनों पक्ष अभी भी एक व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले महीने बातचीत हुई थी, इसलिए मुझे लगता है कि दोनों पक्षों को उम्मीद है।'
अमेरिका में शटडाउन का संकट?
शिक्षा, पर्यावरण और अन्य सेवाएं ठप रहेंगी
उनके निर्वासन एजेंडे के पूरी गति से आगे बढ़ने की उम्मीद है, जबकि शिक्षा, पर्यावरण और अन्य सेवाएं ठप रहेंगी। आर्थिक नतीजों का असर पूरे देश में पड़ने की उम्मीद है। आधी रात की समयसीमा से पहले व्हाइट हाउस में ट्रंप ने कहा, हम इसे बंद नहीं करना चाहते। लेकिन राष्ट्रपति, जिन्होंने इस हफ्ते कांग्रेस नेतृत्व के साथ निजी तौर पर मुलाकात की, इस नतीजे को रोकने के लिए डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के बीच कोई समझौता कराने में असमर्थ दिखाई दिए। यह तीसरी बार है जब ट्रंप ने संघीय वित्त पोषण में चूक की अध्यक्षता की है, इस वर्ष व्हाइट हाउस में उनकी वापसी के बाद यह पहली बार हुआ है।
"बिग ब्यूटीफुल बिल" में मेडिकेड कटौती वापस लेने की मांग
डेमोक्रेट्स ने इस साल की शुरुआत में पारित "बिग ब्यूटीफुल बिल" में मेडिकेड कटौती को वापस लेने की मांग की है। इस बीच, रिपब्लिकन ने इन मांगों को खारिज कर दिया है और बदले में फंडिंग को २१ नवंबर तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। गौरतलब है कि रिपब्लिकन सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों पर नियंत्रण रखते हैं; हालांकि, सीनेट में उनके पास सात वोट कम हैं क्योंकि फंडिंग बिल को पारित होने के लिए ६० वोटों की जरूरत है।
अमेरिका में डेमोक्रेट बनाम रिपब्लिकन
इससे पहले व्हाइट हाउस में मीडिया को संबोधित करते हुए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया था कि शटडाउन की स्थिति बन सकती है। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात के बाद सीनेट के नेता चक शूमर ने कहा कि उन्होंने और प्रतिनिधि हकीम जेफ्रीज, जो सदन के अल्पसंख्यक नेता हैं, राष्ट्रपति को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हो रही कुछ घटनाओं के परिणामों के बारे में बताया और उनके चेहरे से ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने इसके बारे में पहली बार सुना हो।
यह अमेरिका का पहला सरकारी बंद नहीं
हालांकि ट्रंप के कार्यकाल में यह पहला सरकारी बंद नहीं होगा, लेकिन यह सात वर्षों में पहला होगा। पिछला बंद २०८० में ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुआ था और ३५ दिनों तक चला था; यह इतिहास का सबसे लंबा बंद था। वित्त वर्ष की शुरुआत में कांग्रेस में बजट गतिरोध के कारण २०१३ में संयुक्त राज्य अमेरिका में १६ दिनों का सरकारी बंद रहा था।
अमेरिकी सरकार का बंद: आगे क्या होगा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ एजेंसियों में कामकाज ठप होने की संभावना है।
रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि कुछ विभागों में कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है।
ट्रंप प्रशासन ने सरकारी शटडाउन अवधि के दौरान और अधिक संघीय कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दी है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, स्मिथसोनियन संग्रहालय एक हफ्ते तक खुले रह सकते हैं।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि संभावित बंद के दौरान राष्ट्रीय उद्यान खुले रहेंगे या बंद रहेंगे।
ये काम जारी रहेंगे:
सीमा सुरक्षा, कानून प्रवर्तन और हवाई यातायात नियंत्रण जैसी आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी।
इन सेवाओं पर असर:
खाद्य सहायता, सरकारी वित्त पोषित प्री-स्कूल और खाद्य निरीक्षक जैसे कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, अगर बंद लंबे समय तक जारी रहता है, तो हवाई यात्रा पर भी इसका असर पड़ सकता है।
अमेरिका का रवैया, भारत के लिए आपदा में अवसर
- पूर्व राजदूत ने बताई रणनीति,
नई दिल्ली, ६ अक्तूबर - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा एक के बाद एक फैसलों से भारत की मेधा और व्यापार प्रभावित होने की आशंका प्रबल है, लेकिन हमारे लिए यह आपदा में अवसर की तरह है। विश्व के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच रिश्तों में आई तल्खी को गहराई से समझते हुए हमें रणनीति बनाकर आगे बढ़ना होगा।
यह कहना है कि भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी और रूस में तैनात रह चुके अनिल त्रिगुणायत का। पूर्व राजदूत त्रिगुणायत ने सोमवार को भारत-अमेरिका रिश्ता विषय पर आयोजित राष्ट्रीय जागरण विमर्श में कहा कि मेक इन इंडिया पर विशेष जोर होना चाहिए। भारत को आत्मनिर्भर बनना ही होगा।
'अमेरिका सिर्फ लाभ चाहता है'
हालांकि यह कहना जितना आसान है, करना उतना ही चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हमें यह करना ही होगा।ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ और भारत के अन्य देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों के संबंध में ऑनलाइन विमर्श में पूर्व राजदूत ने कहा कि एक बात हमें मान लेनी चाहिए कि अमेरिका हमेशा सिर्फ यह सोचता है कि उसका लाभ कहां है? वह सिर्फ अपने हित की दिशा में ही सोचता है।
उसका रुख यही रहता है कि आप (भारत) रूस या कहीं और से क्यों खरीद कर रहे हैं? सभी देशों के अलग-अलग राष्ट्रों से कूटनीतिक-व्यापारिक संबंध होते हैं और ऐसे समय में जब भारत जैसा बड़ा देश 2047 तक विकसित होने का सपना देख रहा है तो इस तरह का दबाव कैसे बर्दाश्त कर सकता है? उन्होंने कहा कि अमेरिका से अभी जिस तरह की स्थितियां हैं, वे एक अवसर की तरह भी हैं कि आप उन्हें व्यापार में बदलें।'
अमेरिका में स्कूल ड्रॉप आउट काफी ज्यादा
भारत को व्यापार के लिए अभी ढाई दशक तक शांतिपूर्ण माहौल चाहिए। इस लिहाज से दीर्घकालिक रणनीति बनाकर काम करना होगा। जरूरत इस बात की है कि हम भारत में ही उत्पाद तैयार करें। कई बार ऐसा होता है कि जब हमें जरूरत होती है तो संबंधित देशों से उस उत्पाद की उपलब्धता नहीं होती। तकनीक भी नहीं मिल पाती।2050 में सक्षम मैनपावर वाला देश होगा भारत पूर्व राजदूत ने कहा कि अमेरिका में स्कूल स्तर पर 40-50 प्रतिशत ड्रॉप आउट दर है। कॉलेज स्तर पर भी 82 प्रतिशत छात्र प्रथम वर्ष में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।
जाहिर है कि अमेरिका के पास तकनीकी दक्षता का अभाव है और आगे भी रहेगा। भारत ही एक ऐसा देश है जो दुनिया में 2050 तक तकनीकी रूप से सक्षम मैनपावर तैयार करेगा। आज हमें जरूर समस्या है, लेकिन यह स्थिर ही रहेगी, ऐसा नहीं है। जर्मनी और जापान भारत के इंजीनियरों को लेने को तैयार हैं। चीन ने तो भारतीय पेशेवरों के लिए नया वीजा शुरू कर दिया है। जरूरी नहीं है कि एक रास्ता बंद हो गया तो अवसर खत्म हो गए।
भारत-अमेरिका रिश्ता जटिल दौर
सिर्फ सकारात्मक विश्वास के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होती है और भारत की विदेश नीति इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। त्रिगुणायत ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत से इसलिए सबसे ज्यादा खफा दिखते हैं क्योंकि पिछले दिनों पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इसे रोकने का श्रेय लेने की बात ट्रंप बार-बार करते रहे, लेकिन भारत ने इसका खंडन किया। वह चाहते थे कि भारत उनकी वाहवाही करे।
उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ता जटिल दौर से गुजर रहा है, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं है। वैश्विक राजनीति में कूटनीतिक तौर पर कुछ भी स्थायी नहीं होता। भारत-अमेरिका रिश्ता बीती सदी के नौवें दशक से ही थ्री डी के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब उसमें एक और डी जुड़ गया है- डेमोक्रेसी, डिफेंस एंड सिक्योरिटी, डायस्पोरा यानी प्रवासी भारतीय समुदाय और डिसरप्शन। चौथा डी ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में बना है। ट्रंप हमेशा धमकी भरे अंदाज में रहते हैं जो भारत के लिए समस्या है।
इएफटीए के साथ भारत का व्यापार समझौता
ब्रुसेल्स में यूरोपीय यूनियन के साथ 14वे दौर की वार्ता आज शुरू हो रही है। भारत-ईयू आर्थिक साझेदारी के बारे में बताते हुए यूरोपीय यूनियन के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि भारत में ईयू की कंपनियों ने 2024 में कुल 186 अरब यूरो का कारोबार किया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग 5% है। इन कंपनियों ने 23.5 अरब यूरो का निर्यात किया, जो भारत के कुल वस्तु निर्यात का लगभग 6% है। उन्होंने कहा कि वार्ता दल के सदस्य कड़ी मेहनत कर रहे हैं, हालांकि बातचीत चुनौतीपूर्ण है और महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि ईयू और भारत एक निवेश संरक्षण समझौते (Investment Protection Agreement) पर भी बात कर रहे हैं जिसका उद्देश्य निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी वातावरण बनाना है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में उच्च स्तर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आ सके। उन्होंने कहा, एफटीए वार्ता के 13वें दौर में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। यूरोपीय यूनियन एक सार्थक पैकेज के लिए तैयार था और अब भी तैयार है।
ईयू चाहता है कि भारत ऑटोमोबाइल पर आयात शुल्क कम करे। इसके अलावा वह वाइन तथा अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात भी बढ़ाना चाहता है। भारत की मांग ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ श्रम सघन सेक्टर के लिए ड्यूटी-फ्री एक्सेस की है। भारत की एक और चिंता जनवरी 2026 से लागू होने वाला कार्बन टैक्स है। इससे भारत के लिए स्टील, एल्युमिनियम, सीमेंट और उर्वरकों का निर्यात मुश्किल होगा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 6 से 7 अक्टूबर को कतर की राजधानी दोहा के दौरे पर हैं। उनकी इस यात्रा में एफटीए पर व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस को अंतिम रूप दिया जा सकता है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि गोयल की इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार की समीक्षा, मौजूदा व्यापार बाधाओं और नॉन-टैरिफ मुद्दों के समाधान पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।
बयान में कहा गया है, “वित्त, कृषि, पर्यावरण, पर्यटन, संस्कृति और स्वास्थ्य सेवा जैसे अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग भी भारत और कतर के बीच बहुआयामी साझेदारी को गहरा करने के उद्देश्य से होने वाली चर्चाओं का एक अभिन्न अंग होगा।” भारत-कतर संयुक्त व्यापार परिषद की पहली बैठक के लिए गोयल के साथ उद्योग प्रतिनिधिमंडल भी जा रहा है। दोनों देश इस हफ्ते ट्रेड डील का ऐलान कर सकते हैं।
थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-कतर व्यापार 14.15 अरब का रहा, जिसमें ज्यादातर हिस्सा ऊर्जा का था। कतर से भारत के कुल आयात में 89% हिस्सा पेट्रोलियम का था, जिसकी वजह से भारत का व्यापार घाटा 10.78 अरब डॉलर रहा। भारत ने कतर को 1.68 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया, जिसमें लोहा और इस्पात, बासमती चावल और आभूषण प्रमुख थे। आयात बढ़कर 12.46 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। कतर में 8 लाख से अधिक भारतीय रहते और काम करते हैं, जो रेमिटेंस का एक प्रमुख स्रोत है।
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के मुताबिक पिछले महीने दोहा में इजराइली हमले ने सुरक्षा को लेकर अमेरिका की सीमाओं को उजागर किया है। उस घटना के बाद कतर दूसरे देशों के साथ संबंधों में विविधता लाने के प्रयास कर रहा है। कतर भारत को निवेश, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक सहयोग के लिए एक स्थिर एशियाई साझेदार के रूप में भी देखता है।
भारत के लिए भी कतर पश्चिम एशिया रणनीति में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। कतर भारत के एलएनजी और एलपीजी के प्रमुख सप्लायरों में से एक है। श्रीवास्तव के अनुसार, दोहा के साथ घनिष्ठ राजनीतिक संबंध भारत को खाड़ी क्षेत्र में, विशेष रूप से क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता के बीच, संबंधों को संतुलित करने में मदद करते हैं।
श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को रसायनों, उर्वरकों और धातुओं में औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देकर आयात में विविधता लानी चाहिए। इंजीनियरिंग वस्तुओं, मशीनरी और मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों के निर्यात का विस्तार करना चाहिए। इसके अलावा रणनीतिक संबंधों को गहरा करने के लिए ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर में संयुक्त उद्यमों की संभावनाएं तलाशनी चाहिए।
स्टारमर के भारत दौरे में एफटीए कार्यान्वयन पर बात
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने के बाद कीर स्टारमर पहली बार भारत आ रहे हैं। इस यात्रा में बढ़ती आर्थिक साझेदारी और मुक्त व्यापार समझौते के कार्यान्वयन पर चर्चा होने की उम्मीद है। खबरों के अनुसार मुंबई में 9 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्टारमर ‘विज़न 2035’ के अनुरूप भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी में प्रगति का जायजा लेंगे। दोनों नेता उद्योगपतियों के साथ भी चर्चा करेंगे।
भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता दुनिया की पांचवीं और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है। ब्रिटेन ने एफटीए के तहत 99.1% टैरिफ लाइन पर जीरो ड्यूटी की पेशकश की है। कुल 26 अध्याय वाला यह एफटीए सबसे व्यापक है। यह समझौता भारतीय बिजनेस को कपड़ा, चमड़ा, जूते, खेल के सामान और खिलौने, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और इंजन जैसे क्षेत्रों में बाजार पहुंच प्रदान करेगा।
EFTA से भारत में विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) 1 अक्टूबर से लागू हो गया है। EFTA में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। उद्योग चैंबर फिक्की की डायरेक्टर जनरल ज्योति विज ने एक लेख में लिखा है कि यह समझौता अन्य पारंपरिक FTA से कहीं बढ़कर है। यह पहला व्यापार समझौता है जिसमें अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख से ज्यादा रोजगार सृजन की प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। TEPA सुनिश्चित करता है कि व्यापार उदारीकरण सीधे तौर पर ‘मेक इन इंडिया’ का समर्थन करे और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में इसके इंटीग्रेशन को मजबूत करे।
यह समझौता भारत के लिहाज से इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसके तहत अगले 15 वर्षों में होने वाला निवेश भारत की 4 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर की अर्थव्यवस्था को 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत को निवेश दर मौजूदा लगभग 30% से बढ़ाकर कम से कम 33-34% करना होगा।
फिक्की की डीजी के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में कुल लगभग 750 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। लेकिन उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के लिए वर्ष 2035 तक 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक और 2040 तक और 2.4 ट्रिलियन डॉलर के एफडीआई की आवश्यकता है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन यह उम्मीद देता है कि TEPA के तहत 100 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य बहुत कम समय में पूरा हो जाएगा।
ज्योति विज के अनुसार, यदि भारत अगले 10 वर्षों में EFTA से 75-100 अरब डॉलर आकर्षित करने में कामयाब रहा तो तो भारत में कुल FDI प्रवाह में इन चार देशों की हिस्सेदारी लगभग 4-5% होगी, जो अभी 1.6% है। यदि भारत अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ TEPA मॉडल को दोहराने में कामयाब होता है, तो यह निवेश आधारित विकास के चक्र को गति प्रदान कर सकता है।
यूक्रेन पर रूस का भीषण हवाई हमला
- ५०० ड्रोन, ५०+ मिसाइलें, ५ मौतें,
कीव, ५ अक्टूबर — रूस ने रविवार को लगातार दूसरे दिन यूक्रेन पर बड़ा हमला किया। रूसी सेना ने रातभर ड्रोन, मिसाइल और बमों से हमला किया, जिसमें ५०० से अधिक ड्रोन और ५० बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इस हमले में कम से कम पांच नागरिकों की मौत हुई और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की इस हमले से बेहद नाराज हुए। उन्होंने बताया कि रूस ने यूक्रेन के नौ अलग-अलग क्षेत्रों में ५० से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग ५०० ड्रोन दागे हैं। उनके अनुसार, यह हमला बेहद संगठित और व्यापक था, जिसका उद्देश्य नागरिक क्षेत्रों में भय फैलाना और मूलभूत सेवाओं को बाधित करना था।
इस रूसी हमले में यूक्रेन के ल्वीव शहर को सबसे अधिक नुकसान हुआ। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, ल्वीव पर ड्रोन और मिसाइलों की बारिश हुई जिससे चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। ल्वीव के मेयर आंद्री सदोवी ने बताया कि शहर के दो जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई और सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ा। शहर के बाहरी हिस्से में एक व्यावसायिक परिसर में आग लग गई जिसे दमकल विभाग ने घंटों की मशक्कत के बाद बुझाया।
झापोरिझ्झिया शहर में भी बड़ा नुकसान हुआ। वहां की गवर्नर इवान फेडोरोव ने बताया कि एक महिला की मौत हुई और एक 16 वर्षीय लड़की समेत नौ लोग घायल हुए। इस हमले से स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
यूक्रेन की आपातकालीन सेवा ने बताया कि देशभर में घायल लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य में जुटे हैं। इस हमले से यूक्रेन के कई क्षेत्रों में बिजली, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाएं बाधित हो गई हैं, जिससे जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ५०००० से अधिक घर और कई शहर अंधेरे में डूब गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस हमले पर गंभीर चिंता जताई है। कई देशों ने इसे अवैध और नागरिकों पर हिंसा का कृत्य बताया है। यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस हमले की निंदा की है और तत्काल युद्धविराम की मांग की है।
अपने भाषण में ज़ेलेंस्की ने देशवासियों से संयम बनाए रखने की अपील की और कहा कि यूक्रेन अपने संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए डटकर लड़ेगा। उन्होंने शांति बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समर्थन की मांग की।
शनिवार को इससे पहले, रूस ने ड्रोन हमले में यूक्रेनी ट्रेन और पावर ग्रिड को निशाना बनाया था, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। यह हमला एक बार फिर यूक्रेन-रूस युद्ध की जटिलता और तीव्रता को उजागर करता है, जहां आम नागरिक हिंसा का शिकार हो रहे हैं।
जल्दी वहां से हटो वरना...
- ट्रंप ने दी हमास को नई चेतावनी,
वॉशिंगटन, ४ अक्टूबर - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर हमास को चेतावनी दी है. गाजा पर इजरायल की तरफ से बमबारी में उल्लेखनीय कमी आई है. इन खबरों के बीच ही ट्रंप ने हमास को जल्द से जल्द गाजा से पीछे हटने को कहा है. अमेरिका की मध्यस्थता वाली गाजा शांति योजना के प्रभावी होने के बाद इजरायल का रुख काफी बदल गया है. लेकिन हमास जस का तस है और अब ट्रंप ने फिलिस्तीनी आतंकी समूह नए सिरे से आगाह किया है.
इजरायल की तारीफ, हमास को सुनाया
ट्रंप ने सोशल मीडिया साइट ट्रूथ सोशल पर लिखा, 'मैं इस बात की सराहना करता हूं कि इजरायल ने बंधकों की रिहाई और शांति समझौते को पूरा करने के लिए बमबारी अस्थायी तौर पर रोक दी है. हमास को जल्दी कदम उठाना होगा, वरना सारी शर्तें धरी की धरी रह जाएंगी. मैं देरी बर्दाश्त नहीं करूंगा जैसा कि कई लोगों को लगता है, या ऐसा कोई भी नतीजा नहीं जहां गाजा फिर से खतरा बन जाए. इसे जल्द से जल्द पूरा करें. सभी के साथ उचित व्यवहार किया जाएगा!'
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और वरिष्ठ अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ, हमास की ओर से बंधकों की रिहाई को अंतिम रूप देने के लिए मिस्र जा रहे थे. यह हमास की तरफ से दो साल से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बनाई गई शांति योजना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद हुआ.
इजरायल की बमबारी कम
गाजा शहर पर इजरायल की बमबारी 'काफी कम' हो गई है. हालांकि कम से कम पांच फिलिस्तीनी मारे गए हैं. एक अस्पताल अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी है. इजरायली की सेना ने कहा कि देश के नेताओं ने उसे गाजा में युद्ध खत्म करने की अमेरिकी योजना के पहले चरण की तैयारी करने का निर्देश दिया है. एक अधिकारी ने बताया कि इजरायल गाजा में सिर्फ रक्षात्मक स्थिति में आ गया है और सक्रिय रूप से हमला नहीं करेगा. अधिकारी ने कहा कि क्षेत्र से कोई भी सेना नहीं हटाई गई है.
हमले को हो जाएंगे दो साल
मंगलवार यानी ७ अक्टूबर को हमास के इजरायल पर हमले की बरसी को दो साल हो जाएंगे. ट्रंप इस मौके पर सभी बंधकों को वापस लौटाने के अपने वादों को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित नजर आ रहे हैं. शुक्रवार को, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा कि इजरायल उस युद्ध को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है जो ७ अक्टूबर २०२३ को हमास की ओर से इजरायल पर हमले के बाद शुरू हुआ था.
भारत झुकेगा नहीं... : व्लादिमीर पुतिन
- ट्रंप टैरिफ पर पुतिन ने डंके की चोट पर कह दी प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात?
नई दिल्ली, (३ ऑक्टोबर) - रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को ट्रंप टैरिफ पर मोदी के मन की बात सुनाई. उन्होंने साफ कह दिया कि ट्रंप के टैरिफ नाकाम होंगे. उन्होंने भारत को स्वाभिमानी बताया और कहा कि भारतीय लोग कभी भी किसी के सामने अपमान स्वीकार नहीं करेंगे.
ट्रंप टैरिफ पर भारत का स्टैंड क्लियर है. भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा. यह बात अब पूरी दुनिया को पता है. खुद भारत के दोस्त रूस ने भी दुनिया को बताया है कि ट्रंप के टैरिफ पर भारत का क्या जवाब है. जी हां, ट्रंप टैरिफ पर पीएम मोदी के मन में क्या है, यह बात दोस्त पुतिन को भी पता है. तभी तो ट्रंप टैरिफ पर जवाब देने के लिए सच्चे दोस्त की तरह पुतिन भारत के साथ खड़े रहे. गुरुवार को वाल्डई क्लब में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं है. भारत स्वाभिमानी है. वह अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा. ट्रंप के टैरिफ नाकाम होकर रहेंगे.
दरअसल, भारत और पीएम मोदी पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने गुरुवार को बड़ा बयान दिया. ट्रंप टैरिफ को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय लोग कभी अपमान स्वीकार नहीं करेंगे. मैं प्रधानमंत्री मोदी को जानता हूं, वो ऐसा नहीं कर सकते. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बगैर पुतिन ने इशारों में जवाब दिया. व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि भारत झुकने वाला नहीं है. नई दिल्ली के पास बाहरी दबाव के आगे झुकने का कोई कारण नहीं है.
पुतिन ने कही मोदी के मन की बात
पुतिन ने ठीक वही बात कही है, जो भारत का टैरिफ पर स्टैंड रहा है. अमेरिका ने भारत पर ५० फीसदी टैरिफ लगा रखा है. इसके बाद भी भारत झुका नहीं है. पीएम मोदी ने तो ट्रंप टैरिफ का काट भी निकाल लिया है. तभी वह स्वदेशी पर लगातार जोर दे रहे हैं. ट्रंप टैरिफ पर सबसे पहले उन्होंने कहा था कि भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा. भारत किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा, चाहे इसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़े.
भारत-रूस की दोस्ती की पुतिन ने दिखाई झलक
भारत और रूस की दोस्ती कैसी है, इस सवाल का जवाब है पुतिन का ट्रंप टैरिफ पर बयान. जिस तरह से पुतिन ने पूरी दुनिया के सामने डंके की चोट पर कहा है कि भारत किसी प्रेशर में झुकने वाला नहीं, यह बताता है कि मुश्किल वक्त में भी कैसे भारत और रूस की दोस्ती अपना रंग दिखा रही है. चाहे ट्रंप टैरिफ हो या कोई प्रतिबंध, भारत और रूस की दोस्ती की दीवार को कोई तोड़ नहीं सकता. यही वजह है कि पुतिन ने गुरुवार को कहा कि भारत के साथ रूस का कभी कोई समस्या या अंतर्राज्यीय तनाव नहीं रहा. कभी नहीं.
पुतिन ने भारत की तारीफ की
पुतिन ने तो इतना कह दिया कि अगर भारत रूसी ऊर्जा खरीदना बंद कर देता है, तो उसे १०० करोड़ डॉलर के बीच का नुकसान होने का अनुमान है. उन्होंने कहा, ‘मेरा विश्वास कीजिए, भारत जैसे देश के लोग राजनीतिक नेतृत्व द्वारा लिए गए फैसलों पर कड़ी नजर रखेंगे और किसी के सामने किसी भी तरह का अपमान नहीं होने देंगे.’ पुतिन ने भारत का अभार भी जताया. उन्होंने कहा कि रूस भारत और चीन जैसे देशों का आभारी है जिन्होंने ब्रिक्स की स्थापना की. ये ऐसे देश हैं जो किसी का पक्ष लेने से इनकार करते हैं और वास्तव में एक न्यायपूर्ण विश्व बनाने की आकांक्षा रखते हैं.
बलूचिस्तान का पाकिस्तानपर संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप
-अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांगा समर्थन
क्वेटा, (१२ सितम्बर) - बलूचिस्तान गणराज्य ने पाकिस्तान पर बलूचिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता और संसाधनों के अवैध दोहन का गंभीर आरोप लगाया है। बलूच नेता मीर यार बलूच ने पाकिस्तान की कार्रवाइयों को "साँप" की संज्ञा दी, जो "उसी हाथ को काटता है जो उसे खिलाता है।" उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूच राष्ट्र के अधिकारों को मान्यता देने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बलूचिस्तान के साथ साझेदारी करने की अपील की है।
बलूचिस्तान गणराज्य ने पाकिस्तान पर अवैध हस्तक्षेप, अनधिकृत प्रतिष्ठानों की स्थापना और बलूच खनिज संपदा को विदेशी शक्तियों को हस्तांतरित करने का आरोप लगाया। मीर यार बलूच ने कहा कि ये कार्रवाइयाँ बलूच राष्ट्र की संप्रभुता और अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बलूचिस्तान अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संसाधनों की रक्षा के लिए ऊर्जा और संसाधन आपूर्ति मार्गों पर प्रतिबंध सहित सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
मीर यार बलूच ने बलूचिस्तान के भूगोल को राष्ट्रीय विरासत का अभिन्न अंग बताया गया, जो क्वेटा से ताफ्तान, ज़ाहेदान से चाबहार और ग्वादर तक फैला है। बलूच राष्ट्र ने अपनी तटस्थता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति को रेखांकित करते हुए कहा कि उसकी भूमि का उपयोग कभी किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं किया गया।
हालांकि, बलूचिस्तान ने पाकिस्तान और कुछ पड़ोसी देशों पर पिछले ७८ वर्षों से उसके संसाधनों का शोषण करने और क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। प्रेस रिलीज में दावा किया गया कि बलूचिस्तान की भूमि, समुद्र और हवाई क्षेत्र का उपयोग छद्म युद्धों के लिए किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अफ़गानिस्तान और अन्य क्षेत्रों में विनाशकारी परिणाम सामने आए।
बलूचिस्तान गणराज्य ने वैश्विक समुदाय से पाकिस्तान के "झूठे आख्यानों" और भ्रष्ट सैन्य-राजनीतिक तंत्र को समर्थन देने वाली नीतियों को त्यागने का आह्वान किया। इसके बजाय, उसने बलूचिस्तान को एक संसाधन-संपन्न और शांति के लिए प्रतिबद्ध राष्ट्र के रूप में साझेदारी का प्रस्ताव दिया। बलूच नेता मीर बलूच ने समानता, पारदर्शिता और आपसी सम्मान के आधार पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, लोकतांत्रिक सरकारों और निवेशकों के साथ सहयोग की इच्छा जताई। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य क्षेत्रीय स्थिरता और मानव कल्याण को बढ़ावा देना है।"



















