अमेरिका ने चीनपर ठोका १००% टैरिफ
- ड्रैगन ने ट्रंप की वो दुखती नस दबा दी,
- चीन-अमेरिका की जंग में भारत के हाथ लगी लॉटरी,
वाशिंगटन, १२ अक्तूबर २५ - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टैरिफ का दांव अब उल्टाा पड़ने लगा है. जिस हंटर को चलाकर ट्रंप अमेरिका फर्स्ट का नारा दे रहे थे, अमेरिकी इकोनॉमी में बूस्ट की बात कर रहे थे, अब वो तमाम दावे फुस्स होते नजर आ रहे हैं.उल्टा अमेरिका में इस टैरिफ ने महंगाई ता बम फोड़ दिया है. सबसे बड़ा बम तो चीन ने फोड़ा है. अमेरिका के टैरिफ धौंस से बौखलाए चीन ने रेअर अर्थ मटेरियल के निर्यात को और सख्त करने का ऐलान किया.
चीन के एक्शन से चित हुए ट्रंप
चीन ने अमेरिकी पोत पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था. अमेरिका के रेयर अर्थ मिनरल्स शिपमेंट को भी कम करने का फैसला कर दिया. चीनी एक्शन से डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर १०० फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी, लेकिन इसका नुकसान भी ट्रंप को झेलना पड़ा.चीन की इस कार्रवाई का सबसे बड़ा नुकसान अमेरिका को होने वाला है. अमेरिकी चिप कंपनियों, कार, ईवी जैसी कंपनियों के लिए रेअर अर्थ की उलपब्धता नई समस्या बन गई. चीन के ऐलान पर ट्रंप का भी गुस्सा फूटा और उन्होंने चीनी आयात पर १०० फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला कर दिया. ट्रंप के ऐलान के बाद चीनी सामानों ने अमेरिका में आयात पर १३० फीसदी टैक्स या टैरिफ लगेगा.
बुरी तरह फंसे ट्रंप
ट्रंप दावा कर रहे थे कि टैरिफ से अमेरिका की कमाई बढ़ेगी. अमेरिकियों की आमदनी बढ़ेगी, अमेरिका की इकोनॉमी को फायदा होगा, लेकिन स्थिति बिल्कुल उल्ट दिख रही है. अमेरिका में महंगाई बढ़ती जा रही है. टैरिफ बढ़ने से बाहर से आने वाली चीजों की कीमत बढ़ने से लोगों के खर्च बढ़ गए हैं. महंगाई तो बढ़ी, साथ ही साथ बेरोगजारी बढ़ रही है. पहले से कर्ज पर बैठे अमेरिका के संबंध दुनियाभर के देशों के साथ बिगड़ रहे हैं. अब चीन के साथ बढ़े विवाद ने अमेरिकी कंपनियों को बड़ा झटका दिया है. चीन और अमेरिका की लड़ाई ने क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में तबाही मचा दी. सिर्फ क्रिप्टोमार्केट ही नहीं अमेरिकी शेयर बाजार में भारी तबाही मची है. एनवीडिया, टेस्ला, अमेजॉन के शेयर बुरी तरह से टूट गए. क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन में भारी गिरावट देखने को मिली, निवेशकों को एक ही दिन में १.७ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो गया.
चीन ने चली ऐसी चाल, तिलमिला उठे डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने १ नवंबर से चीन पर कुल १३० फीसदी टैरिफ की बात कही, जिसपर चीन ने भी जवाब देते हुए कहा कि वो पीछे हटने वालों में से नहीं है.चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि हम टैरिफ वॉर नहीं चाहते हैं, लेकिन हमें इससे डर भी नहीं लगता है. चीन के जवाब से साफ है कि वो बैकफुट पर नहीं आने वाला है. चीन के रेयर अर्थ पर लिए गए फैसले से अमेरिकी चिप कंपनियों की हालात बिगाड़ दी. क्वालकॉम के शेयरों में ७.३% और एनवीडिया के शेयरों में लगभग ५% की गिरावट आई है. वहीं एनवीडिया के चिप के आयात पर प्रतिबंध की बात कही गई है. बीजिंग घरेलू सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है. चीन ने अमेरिकी चिप कंपनी क्वालकॉम के खिलाफ एंटीट्रस्ट जांच शुरू कर दी.
रेअर अर्थ पर चीन का नियंत्रण, अब खिसकेगी ट्रंप के पैरों तले जमीन
टैरिफ वॉर, ट्रेड पर उठापटक और अब चीन के रेअर अर्थ मिनिरल्स पर सख्ती ने अमेरिका को विकट परिस्थिति में ला दिया है. अमेरिका पहले से ही शटडाउन की वजह से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. हर दिनों अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है. ऐसे में ट्रे़ड वॉर की वजह से बढ़ती लागत से आने वाले महीनों में कमाई पर असर डालेगी. खुदरा और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से लोगों पर दवाब बढ़ेगा. सरकारी शटडाउन के कारण बाजार की भावना नाजुक बनी हुई है, ऐसे में चीन के साथ टैरिफ विवाद अमेरिका की इकोनॉमी को गंभीर स्थिति में ला सकता है. दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच टैरिफ वॉर से ग्लोबल इकोनॉमी को झटका लग सकता है. इस युद्ध से कई देश प्रभावित हो सकते हैं.
भारत के लिए शानदार मौका
अमेरिका और चीन के बीच इस विवाद का फायदा भारत को हो सकता सकता है.इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलेगा. चीनी सामानों पर टैरिफ बढ़ने से अमेरिका में भारतीय सामानों की कीमत उसकी तुलना में कम होगी, जो मांग को बढ़ा सकती है. चीन से आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से भारत के लिए अमेरिका को निर्यात के बड़े अवसर खुलेंगे. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस की माने तो अमेरिका और चीन के झगड़े से भारत के 86 बिलियन डॉलर, ७.३ लाख करोड़ रुपए के एक्सपोर्ट में और बढ़ोतरी हो सकती है. खासकर टेक्सटाइल, खिलौने और अन्य सामानों के एक्सपोर्टर्स को बढ़ावा मिलेगा. बता दें कि वित्त वर्ष २०२४-२५ में अमेरिका लगातार चौथी बार भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है. दोनों देशों के बीच १३१.८४ अरब डॉलर . इस विवाद से इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है.
on - Sunday, October 12, 2025,
Filed under - अमेरिका , आंतरराष्ट्रीय
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