टैरिफ, नीतिगत अनिश्चितता और घाटा बढ़ा

- डॉलर का इमारत ढह रही है,

नई दिल्ली, ०८ अक्टूबर २०२५ - अमेरिका में शटडाउन चल रहा है| वहीं, अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सरकारी शटडाउन को लेकर चिंताओं के कारण तेजी के बीच सोना पहली बार ४,००० डॉलर प्रति औंस के पार चला गया| ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोने के भाव पूरी दुनिया में आसमान छू रहे हैं| वहीं, डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं, क्योंकि सरकार का बंद एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है और इसका कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है| अमेरिका में मंदी के हालात हो रहे हैं| वहीं, दूसरी ओर डॉलर का एकाधिकार भी कम हो रहा है|

अमेरिकी अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे ढह रही है

डेली इकॉनॉमी मे छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन का नवीनतम आर्थिक पूर्वानुमान अमेरिका के लिए एक चेतावनी की तरह है| हालांकि संगठन ने वर्ष की पहली छमाही में आश्चर्यजनक लचीलेपन के बाद २०२५ में वैश्विक विकास दर को बढ़ाकर ३.२ प्रतिशत कर दिया है, फिर भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से गिरावट का अनुमान है| २०२४ में २.८ प्रतिशत की वृद्धि दर से घटकर २०२५ में केवल १.८ प्रतिशत और फिर २०२६ में १.५ प्रतिशत तक गिर जाएगी|

इस रिपोर्ट में वाल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से बताया गया है कि ओइडीसी का अब मानना है कि निकट भविष्य में अमेरिका की आर्थिक वृद्धि कम तेजी से धीमी होगी| हालांकि, यह चेतावनी भी दी है कि २०२६ में संरक्षणवादी उपायों के पूर्ण रूप से प्रभावी होने पर टैरिफ का कड़ा असर पड़ेगा| 

डॉलर के गढ़ में लगी सेंध, ब्रिक्स ने बदला गणित

फायबर २ फ्याशन के अनुसार, दशकों से अमेरिकी डॉलर ने वैश्विक वित्त पर अपनी अटूट पकड़ बनाए रखी है| यह व्यापार, आरक्षित निधियों और सीमा-पार समझौतों के लिए एक मानक माध्यम रहा है| यह वस्तुओं की कीमतें तय करने से लेकर केंद्रीय बैंक की नीतियों तक हर चीज के लिए एक आधार है| हालांकि, बदलते समीकरणों, बढ़ते संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक बदलाचों के चलते दुनिया में अब डॉलर के इस साम्राज्य में सेंध लग चुकी है| भले ही अभी डॉलर का पलड़ा भारी हो, मगर उसके गढ़ में सेंध लग चुकी है| ब्रिक्स के देश अब अपनी मुद्राओं में कारोबार करने पर सहमत हो गए हैं| ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे|

विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मौजूदगी ८८ फीसदी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हवाले से रिपोर्टों में दावा किया गया है कि १९९९ और २०१९ के बीच पूरे अमेरिका में व्यापार चालान में डॉलर का योगदान ९६ प्रतिशत, एशिया-प्रशांत में ७४ प्रतिशत और अन्य जगहों पर ७९ प्रतिशत था| विदेशी मुद्रा बाजार में इसकी उपयोगिता बेजोड़ है, जहां यह लगभग ८८ प्रतिशत मुद्रा विनिमय में शामिल है|

ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अमेरिका को पहुंचाया नुकसान

अगर रिपोर्टों पर विश्वास किया जाए तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के साथ कई देशों के कारोबार को ट्रेड वॉर बना दिया| ट्रंप की हाई टैरिफ नीतियों ने अमेरिका के संबंध कई देशों से बिगाड़ दिए| पिछले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाया गया था| इसमें ब्रिक्स की ओर से तथाकथित डी-डॉलरीकरण के प्रयासों पर जोर दिया गया|

चीन, रूस और इंडोनेशिया ने कर दी पहल

हाल ही में, चीन और इंडोनेशिया ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में अपनी घरेलू मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक स्थानीय मुद्रा निपटान ढांचा शुरू करके एक ठोस कदम उठाया है| यह पहल मई में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन पर आधारित है, जिसके तहत भुगतान संतुलन से संबंधित सभी मदों को शामिल करने के लिए एक पूर्व समझौते का विस्तार किया गया था| इससे पहले चीन और रूस की ओर से अपनी मुद्राओं का उपयोग करके व्यापार करने की भी पहले खबरें आई हैं, जबकि कुछ देशों ने कथित तौर पर ऐसे समझौतों की सक्रिय रूप से वकालत की है जो स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देते हैं या वैकल्पिक निपटान मानक अपनाते हैं|

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on - Wednesday, October 8, 2025,
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