रेलयात्रियों को बड़ी खुशखबरी!
- जल्द कंफर्म टिकट की भी बदल पाएंगे तारीख, नहीं देना होगा कैंसिलेशन चार्ज,
दिल्ली, ७ अक्तूबर - अगर आपकी ट्रेन यात्रा कभी आखिरी वक्त पर टल जाती है और आपको टिकट रद्द कराने की झंझट झेलनी पड़ती है, तो अब राहत की खबर है. भारतीय रेलवे जल्द ही यात्रियों के लिए एक नई सुविधा शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत कंफर्म टिकट की यात्रा तिथि भी बदली जा सकेगी. सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर रेलवे गंभीरता से विचार कर रहा है और बहुत जल्द इसे लागू किया जा सकता है.
अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. अगर यात्रियों की यात्रा योजना बदल जाती है, तो उन्हें टिकट कैंसिल कराकर नई तारीख पर नई बुकिंग करनी पड़ती है. इससे जहां नई बुकिंग का खर्च बढ़ता है, वहीं पुराने टिकट का कैंसिलेशन चार्ज भी कट जाता है. कई बार यात्रियों को यात्रा टलने के कारण दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है.
क्या होगा टिकट बुकिंग का नया नियम?
नए प्रस्ताव के तहत यात्रियों को अपने कंफर्म टिकट की यात्रा तिथि ऑनलाइन बदलने की अनुमति दी जाएगी. इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. यानी अगर आपने किसी दिन की यात्रा का टिकट लिया है और किसी कारणवश वह तारीख बदलनी पड़ जाए, तो आप उसी टिकट को नए दिन के लिए रीशेड्यूल कर सकेंगे. यह सुविधा पूरी तरह डिजिटल होगी और यात्री इसे IRCTC की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से उपयोग कर सकेंगे.
पैसेंजर्स को मिलेगी बड़ी राहत!
सूत्रों ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में यात्रियों को टिकट रद्द करने पर काफी नुकसान होता है, जबकि यात्रा योजनाएं कभी भी बदल सकती हैं. ऐसे में रेलवे को एक अधिक लचीली व्यवस्था लानी चाहिए जिससे लोगों को कैंसिलेशन चार्ज न देना पड़े.
हालांकि नई व्यवस्था में एक बात साफ की गई है — यात्रा की नई तारीख पर सीट की उपलब्धता के अनुसार ही कंफर्मेशन मिलेगा. यानी अगर उस तारीख पर ट्रेन में सीटें खाली हैं, तभी आपका टिकट उस तारीख के लिए मान्य हो जाएगा. अगर नए दिन का किराया पुरानी बुकिंग से अधिक है, तो यात्री को केवल उस अंतर की राशि भरनी होगी.
क्या है टिकट कैंसिलेशन का मौजूदा नियम?
वर्तमान नियमों के अनुसार, अगर कोई यात्री ट्रेन के प्रस्थान से 48 से 12 घंटे पहले टिकट कैंसिल करता है, तो किराए का 25 प्रतिशत हिस्सा काट लिया जाता है. वहीं 12 से 4 घंटे के बीच कैंसिल करने पर चार्ज और बढ़ जाता है. अगर चार्ट बन जाने के बाद टिकट रद्द की जाती है, तो रिफंड नहीं मिलता. इस वजह से हर साल लाखों यात्रियों को नुकसान झेलना पड़ता है.
नई नीति लागू होने के बाद यात्रियों को इस आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी. यह कदम न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगा बल्कि रेलवे के लिए भी फायदेमंद रहेगा, क्योंकि इससे रद्द टिकटों की प्रोसेसिंग और रिफंड का बोझ कम होगा. साथ ही यह व्यवस्था भारतीय रेलवे को और अधिक डिजिटल और यात्रियों के प्रति संवेदनशील बनाएगी.
लाखों पैसेंजर्स को मिल गई मनचाही मुराद
नई नीति लागू होने के बाद देशभर के लाखों रेलयात्रियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा. अब टिकट रद्द कराने की झंझट खत्म होगी, और जो लोग अक्सर बिजनेस या इमरजेंसी के कारण यात्रा टालते हैं, उन्हें अब हर बार नया टिकट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. रेलवे की यह नई योजना “यात्री पहले” के सिद्धांत को मजबूत करती है. डिजिटल बदलावों के साथ यह सुविधा भारतीय रेल के लिए एक बड़ी छलांग साबित हो सकती है.

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