वैश्विक अर्थव्यवस्था का संकट बढ़ाने वाला युद्ध

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के विरुद्ध बढ़ते युद्ध के बीच तेल के दामों में हुई जबरदस्त उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के संकट को और गंभीर बना दिया है। जैसे ही कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचीं, दुनिया के विभिन्न देशों में आर्थिक तनाव गहराने लगा है। युद्ध के जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए जा रहे हमलों से पश्चिम एशिया से तेल और गैस की आपूर्ति ठप होने का खतरा लगातार बना हुआ है।

यह क्षेत्र, खासतौर से होर्मुज जलमार्ग, जो तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, वर्तमान में बंद है। इसका मतलब है कि फिलहाल इस रास्ते से तेल और गैस टैंकरों का गुजरना असंभव बना हुआ है। अगर यह स्थिति बनी रहती है और पश्चिम एशिया युद्ध के साए में डूबा रहता है, तो न केवल तेल और गैस बल्कि उर्वरकों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। यह बात अमेरिका और इजरायल को पहले ही समझ लेनी चाहिए थी कि यदि ईरान पर हमला होता है, तो प्रतिक्रिया स्वरूप वह होर्मुज जलमार्ग को अवरुद्ध कर सकता है, जिससे कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा।

यह समझ पाना कठिन है कि अमेरिका ने समय रहते ऐसे कदम क्यों नहीं उठाए, जो पश्चिम एशिया से निरंतर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर सकते। वर्तमान में भी अमेरिकी प्रशासन इस दिशा में सक्रिय नहीं दिखता। उल्टा, राष्ट्रपति ट्रंप ने बढ़ती तेल कीमतों को लेकर अपने बेपरवाह रुख का प्रदर्शन किया है। उनका यह कहना कि ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए यह "छोटी सी कीमत" चुकाने को तैयार हैं, अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना बयान लगता है।

एक ओर ट्रंप खुद को विश्व व्यवस्था का चालक मानते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी है जिसमें वैश्विक स्थिरता खतरे में पड़ गई है। यह भी प्रतीत होता है कि उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता और उसकी आंतरिक परिस्थितियों का समुचित आकलन किए बिना ही कार्रवाई शुरू कर दी। 

इजरायल और अमेरिका का अनुमान था कि अयातुल्ला खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन आसानी से हो जाएगा और ईरानी फौज ज्यादा प्रतिरोध नहीं करेगी। लेकिन उनकी यह सोच गलत साबित होती दिख रही है। ईरान ने खामेनेई के बेटे मोजतबा, जिन्हें उनसे भी अधिक कट्टरपंथी माना जाता है, को अपना नया सर्वोच्च नेता चुना है। यह साफ संकेत देता है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना फिलहाल नहीं है।

साथ ही, ईरानी सेना अधिक आक्रामकता दिखा रही है। वह न केवल इजरायल पर हमले कर रही है बल्कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और तेल परिसरों पर भी हमलों को अंजाम देने की स्थिति में है। ईरान के रवैये से यह स्पष्ट होता है कि वह हार मानने के बजाय पूरे पश्चिम एशिया को इस युद्ध में खींचने की कोशिश कर रहा है। अगर ऐसा होता है, तो यह वैश्विक संकट को और गहरा कर देगा और अंततः इसका प्रभाव अमेरिका पर भी पड़ेगा।

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Posted by - Admin,
on - बुधवार, 11 मार्च 2026,
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