आंध्र प्रदेश का खट्टा, तीखा और स्वादिष्ट पुलिहोरा
पुलिहोरा आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में काफी मशहूर है। इसके कई स्थानीय रूपांतर देखने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में इसे पुलियोदराई और कर्नाटक में पुलियोगरे कहते हैं। हालांकि इन्हें बनाने की प्रक्रिया थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन ये सभी इमली चावल के विभिन्न रूप हैं।
भले ही यह रेसिपी दिखने में एक साधारण वन-पॉट भोजन लग सकती है, लेकिन इसका महत्व त्योहारों और विशेष अवसरों पर काफी अधिक होता है। तेलुगु संस्कृति में, कोई भी पर्व या शादी पुलिहोरा के बिना अधूरी सी लगती है। रेसिपी में इमली के रस को पकाकर गाढ़ा किया जाता है और इसे पके हुए चावल में मिलाकर एक स्वादिष्ट तड़का लगाया जाता है। इसके साथ भुनी हुई मूंगफली इस व्यंजन का स्वाद और बढ़ा देती है।
पुलिहोरा की सबसे खास बात यह है कि यह एक अदभूत ट्रैवल फूड भी है। इसका स्वाद लंबे समय तक कायम रहता है, और इसे एक दिन से अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। पुलिहोरा अगले दिन और ज्यादा स्वादिष्ट हो जाता है। उसका मसालेदार, खट्टा-मीठा स्वाद तब तक और गहराई ले लेता है, जिससे हर बाईट यादगार हो जाती है।

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